नई दिल्ली: वर्तमान मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने बुधवार को केंद्रीय कानून मंत्रालय को न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई को अगला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश भेजी है। न्यायमूर्ति गवई, सीजेआई खन्ना के बाद सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश हैं और वे आगामी 14 मई को भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। सीजेआई खन्ना 13 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू न्यायमूर्ति गवई को पद की शपथ दिलाएंगी। न्यायमूर्ति खन्ना ने नवंबर 2024 में, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ के 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने के बाद सीजेआई का पदभार संभाला था।
न्यायमूर्ति गवई का परिचय
न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई का जन्म 24 नवंबर, 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था। उन्हें 12 नवंबर, 2005 को उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की कई अहम संविधान पीठों का हिस्सा बनकर ऐतिहासिक निर्णय दिए हैं।
ऐतिहासिक फैसलों में भूमिका
- अनुच्छेद 370 को हटाने के केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखने वाली पांच-न्यायाधीशों की पीठ में वे शामिल थे।
- उन्होंने चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द करने वाले फैसले में भी भागीदारी की थी।
- एक सात सदस्यीय संविधान पीठ का हिस्सा रहते हुए उन्होंने कहा कि राज्यों को अनुसूचित जातियों में उप-वर्गीकरण का संवैधानिक अधिकार है।
- मध्यस्थता से जुड़े एक अहम मामले में उन्होंने निर्णय दिया कि बिना मुहर वाले या अधूरी मुहर वाले अनुबंध भी वैध हो सकते हैं।
- उन्होंने उस पीठ का नेतृत्व किया जिसने देशभर में यह निर्देश जारी किया कि बिना ‘कारण बताओ नोटिस’ के किसी भी संपत्ति को नहीं गिराया जा सकता और 15 दिन का जवाब देने का मौका अनिवार्य है।
- वे वन, वन्यजीव और वृक्षों के संरक्षण से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही पीठ का भी नेतृत्व कर रहे हैं।
प्रारंभिक करियर
जस्टिस गवई ने 16 मार्च 1985 को वकालत की शुरुआत की थी। वे नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम, और अमरावती विश्वविद्यालय के स्थायी वकील रह चुके हैं।
- अगस्त 1992 से जुलाई 1993 तक वे बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक रहे।
- 17 जनवरी 2000 को उन्हें नागपुर पीठ के लिए सरकारी वकील और लोक अभियोजक नियुक्त किया गया।
कार्यकाल
जस्टिस गवई नवंबर 2025 में सेवानिवृत्त होंगे, जिससे पहले वे लगभग छह महीने तक भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य करेंगे।
सीजेआई नियुक्ति प्रक्रिया
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया के अनुसार, कानून मंत्री मौजूदा सीजेआई से उनके उत्तराधिकारी का नाम सुझाने के लिए पत्र लिखते हैं। प्रक्रिया में सर्वोच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को अगला सीजेआई नियुक्त किया जाता है, और यह सिफारिश ‘उचित समय’ पर की जाती है।