नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईंधन आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। एलपीजी और कच्चा तेल लेकर आए भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से देश के पश्चिमी तट पर पहुंच गए हैं, जिससे आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता कम होने की उम्मीद है।
सूत्रों के मुताबिक, एलपीजी से भरा टैंकर ‘नंदा देवी’ कांडला बंदरगाह पहुंच चुका है। इस जहाज में करीब 46 हजार टन एलपीजी लदा है। वहीं ‘जग लाडकी’ नामक तेल वाहक जहाज मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचने वाला है, जिसमें लगभग 81 हजार टन कच्चा तेल है।
बताया जा रहा है कि ये दोनों जहाज कतर से रवाना हुए थे और होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारत पहुंचे। इससे पहले ‘शिवालिक’ नामक जहाज भी करीब 45-46 हजार टन एलपीजी लेकर मुंद्रा बंदरगाह पहुंच चुका है।
एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी’ 1 मार्च को कतर के रास लाफान बंदरगाह से रवाना हुआ था और करीब दो सप्ताह की यात्रा के बाद भारत पहुंचा। अधिकारियों के अनुसार, जहाज सफलतापूर्वक वाडिनार एंकरेज तक पहुंच चुका है।
पोत परिवहन, बंदरगाह और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने पहले जानकारी दी थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने के बाद जहाज सुरक्षित रूप से खुले समुद्र में प्रवेश कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ मिलकर करीब 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी भारत ला रहे हैं। ये जहाज शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के स्वामित्व में हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फारस की खाड़ी क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में 22 भारतीय जहाज मौजूद हैं, जिनमें 611 नाविक सवार हैं और सभी सुरक्षित हैं।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। मौजूदा हालात को देखते हुए भारत सरकार और संबंधित एजेंसियां जहाजों की आवाजाही पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
मंत्रालय ने कहा है कि देश के प्रमुख बंदरगाह जहाजों की आवाजाही और माल ढुलाई पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं, साथ ही शिपिंग कंपनियों को लंगरगाह, किराया और भंडारण शुल्क में रियायत समेत हर संभव सहायता दी जा रही है।