केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि राज्य सरकारें विधानसभा से पारित विधेयकों पर राष्ट्रपति या राज्यपाल के फैसलों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दे सकतीं, भले ही वे उन्हें मौलिक अधिकारों का उल्लंघन मानती हों। सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह दलील चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की गैरमौजूदगी में चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ के समक्ष रखी। इस पीठ में जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर शामिल…
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