नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार, 7 फरवरी को नए आयकर विधेयक को मंजूरी दे दी थी, जिसे आज यानी 11 फरवरी को लोकसभा में पेश किए जाने की उम्मीद है। यह विधेयक कर प्रणाली में सुधार का एक बड़ा प्रयास है और इसका उद्देश्य मौजूदा टैक्स फ्रेमवर्क को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी और संसद में पेशी
न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 फरवरी को नए आयकर विधेयक को मंजूरी दी थी। इसके बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा और वित्त पर संसद की स्थायी समिति के पास भेजा जाएगा।
क्या प्रभाव पड़ेगा आम लोगों पर?
यह नया आयकर विधेयक लगभग 60 साल पुराने आयकर अधिनियम 1961 को बदलने के लिए पेश किया गया है। प्रस्तावित विधेयक में करदाताओं को लाभ पहुंचाने के लिए सरल और स्पष्ट भाषा का इस्तेमाल किया जाएगा। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, नए आयकर विधेयक में टैक्स नियमों और उसके क्लॉज को सरल बनाने के लिए सेक्शन की संख्या को 25-30% तक कम किया जा सकता है।
नया आयकर विधेयक तैयार करने की प्रक्रिया
सरकार ने नया इनकम टैक्स बिल तैयार करने से पहले तमाम स्टेकहोल्डर्स की राय ली थी। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने अक्टूबर 2024 में इसके लिए एक खास वेबपेज लॉन्च किया था, जहां टैक्सपेयर, टैक्स एक्सपर्ट और आम नागरिकों से सुझाव मांगे गए थे। इन सुझावों के आधार पर चार मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया था:
- कानून की भाषा को आसान बनाना
- कानूनी विवादों में कमी लाना
- कानून के पालन को आसान बनाना
- गैर-जरूरी प्रावधानों को खत्म करना
सरकार ने इन मुद्दों पर मिले सुझावों को शामिल कर नया आयकर विधेयक तैयार किया है, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि यह विधेयक आम टैक्सपेयर्स की परेशानियों को दूर करने में मदद करेगा।
बड़े बदलाव हो सकते हैं इस विधेयक में
- टैक्स नियमों का सरलीकरण
- अनुपालन (Compliance) को सरल बनाना
- छूट और कटौतियों को युक्तिसंगत (Rationalize) बनाना
- डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए प्रावधान
- विवाद समाधान प्रणाली को मजबूत करना
यह विधेयक टैक्सेशन सिस्टम में सुधार के लिए एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
नए टैक्स स्लैब की घोषणा
बजट 2025 के दौरान वित्त मंत्री ने नए टैक्स स्लैब की घोषणा की थी, जिसके तहत 12 लाख तक की आय को प्रभावी रूप से टैक्स फ्री कर दिया गया है। पहले नो-टैक्स सीमा 7 लाख तक थी, लेकिन नए स्लैब के तहत टैक्स मुक्त आय सीमा को बढ़ाकर 12 लाख कर दिया गया है, जिससे आम लोगों को लाभ मिलेगा।