बिहार: वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने राज्य में बैंकों के कामकाज की प्रभावी निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की है। इस समिति की अध्यक्षता विकास आयुक्त करेंगे। इसका उद्देश्य राज्य के विकास में बैंकों की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाना है।
गुरुवार को आयोजित राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की 95वीं बैठक को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र विकास में बैंकों की भूमिका बेहद अहम है और उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाना होगा। उन्होंने कृषि क्षेत्र में बैंकों की अपेक्षाकृत उदासीनता पर चिंता जताते हुए बैंकों से बिहार के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
बैठक में कृषि, उद्योग, डेयरी एवं पशुपालन मंत्री के साथ-साथ कई वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि मौजूद थे। वित्त मंत्री ने बताया कि राज्य में कार्यरत सभी बैंकों की रैंकिंग की जाएगी। इसके लिए 100 अंकों का एक मानक तय किया गया है, जिसके तहत विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन के आधार पर बैंकों को अंक दिए जाएंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकों को न्यूनतम 40 अंक हासिल करना अनिवार्य होगा। जो बैंक तय मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे बैंकों को काली सूची में डाला जाएगा और उनमें सरकारी धन जमा नहीं किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार बैंकों के साथ सहयोग की नीति पर काम करेगी। अच्छा प्रदर्शन करने वाले बैंकों को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जबकि लोन रिकवरी के मामलों में सरकार की ओर से सभी बैंकों को आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।
वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने जानकारी दी कि बैंकों की रैंकिंग और मूल्यांकन के लिए विस्तृत प्रारूप तैयार कर लिया गया है, जिसे सभी बैंकों को उपलब्ध कराया जाएगा। जनवरी तक के प्रदर्शन के आधार पर 11 बैंक 40 से अधिक अंक प्राप्त कर चुके हैं, जबकि 23 बैंक न्यूनतम मानक से नीचे रहे हैं।