नई दिल्ली : 26 जनवरी 2026 के गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित भारत पर्व के अंतर्गत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की चयनित झांकियों का प्रदर्शन लाल किला, नई दिल्ली में किया जाएगा। इस प्रतिष्ठित आयोजन में बिहार की झांकी को भी शामिल किया गया है, जो राज्य की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेगी।
भारत पर्व के माध्यम से देश की विविध सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक विरासत को झांकियों, हस्तशिल्प, पारंपरिक खानपान और लोक परंपराओं के जरिए आम जनता के सामने लाया जाएगा। “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना के अनुरूप यह मंच राज्यों की विशिष्ट पहचान, पारंपरिक ज्ञान, आजीविका के स्रोत और आधुनिक विकास यात्रा को जोड़ने का सशक्त माध्यम है।
मखाना: लोकल से ग्लोबल की ओर
इस वर्ष भारत पर्व में बिहार की झांकी का विषय “मखाना: लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड” रखा गया है। बिहार का ‘सफेद सोना’ कहलाने वाला मखाना आज मिथिलांचल के तालाबों से निकलकर सुपरफूड के रूप में वैश्विक पहचान बना चुका है। फॉक्स नट या कमल बीज के नाम से पहचाना जाने वाला मखाना अब दुनिया की थालियों तक पहुंच रहा है। वैश्विक मखाना आपूर्ति में भारत की प्रमुख हिस्सेदारी है, जिसमें बिहार का योगदान लगभग 85 से 90 प्रतिशत माना जाता है। वर्ष 2022 में मिथिला मखाना को GI टैग मिलने से इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और भी मजबूत हुई है।
झांकी में दिखेगी मखाना की पूरी यात्रा
बिहार की झांकी को दो प्रमुख भागों में प्रस्तुत किया गया है। पहले भाग में कमल के पत्तों के बीच उभरा सफेद ‘लावा मखाना’, GI टैग का प्रतीक और किनारों पर मिथिला पेंटिंग की कलात्मक बॉर्डर दिखाई देगी। दूसरे भाग में मखाना की पूरी प्रक्रिया—कटाई, बीज संग्रह, ग्रेडिंग, भुनाई, फोड़ाई, पैकिंग और गुणवत्ता जांच—को जीवंत रूप में दर्शाया जाएगा। मिट्टी के चूल्हे पर लोहे की कढ़ाही में मखाना भूनती महिला और लकड़ी के मूसल से मखाना फोड़ता पुरुष पारंपरिक श्रम, महिला सहभागिता और स्थानीय कौशल का सशक्त चित्रण करेंगे।
यह झांकी यह संदेश देती है कि मखाना केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत, श्रम, महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता का प्रतीक है, जो राज्य को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है।
विकास और वैश्विक पहचान का संदेश
भारत पर्व में प्रदर्शित बिहार की यह झांकी दर्शाती है कि किस प्रकार पारंपरिक ज्ञान आधुनिक तकनीक से जुड़कर स्थानीय आजीविकाओं को वैश्विक बाजार तक पहुंचा रहा है। मखाना बोर्ड की स्थापना, निर्यात में वृद्धि और GI टैग की मान्यता इस बात का प्रमाण है कि बिहार का मखाना अब केवल तालाबों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत की वैश्विक पहचान का हिस्सा बन चुका है।
केंद्रीय बजट में मखाना किसानों को बड़ा समर्थन
केंद्रीय बजट 2025–26 में बिहार के मखाना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। केंद्र सरकार ने बिहार में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा करते हुए लगभग 475 करोड़ रुपये के विकास पैकेज को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य मखाना के उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन को सशक्त बनाकर किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।