करंट से मौत के बाद बेगूसराय सदर अस्पताल में चला अंधविश्वास का खेल, बेलन और आटे से युवक को जीवित करने की कोशिश

After death due to electric shock, superstition played a game in Begusarai Sadar Hospital, tried to revive the youth with rolling pin and flour

बेगूसराय: जिला सदर अस्पताल में एक अजीब और चौंकाने वाली घटना सामने आई जब करंट लगने से मरे एक युवक को परिजन अंधविश्वास के सहारे ज़िंदा करने की कोशिश करने लगे। मृतक युवक मनीष कुमार को पहले निजी अस्पताल और फिर सदर अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बावजूद इसके, परिजन एक घंटे तक उसके शरीर पर आटा और नाइसिल पाउडर लगाकर बेलन से मालिश करते रहे।

भीड़ ने देखा अंधविश्वास का नज़ारा
घटना को देखने के लिए अस्पताल में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। किसी ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया, जो कुछ ही घंटों में वायरल हो गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे परिजन मृत युवक के शरीर को आटे और बेलन से मलते हुए उसे वापस जीवन में लाने की कोशिश कर रहे हैं।

हाईटेंशन तार की चपेट में आया था युवक
मृतक की पहचान मनीष कुमार (25) के रूप में हुई है, जो पेशे से वेल्डिंग मिस्त्री था और ललन शर्मा का पुत्र था। वह रिफाइनरी थाना क्षेत्र में स्थित गेट नंबर 10 के पास एक टैंकर पर वेल्डिंग कर रहा था, तभी वह हाईटेंशन तार की चपेट में आ गया। करंट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।

डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप
परिजनों ने सदर अस्पताल के डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि समय रहते इलाज नहीं मिला और किसी ने उनकी बात नहीं सुनी, जिससे मनीष की मौत हो गई। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

अस्पताल प्रशासन की सफाई
सिविल सर्जन अशोक कुमार ने बयान जारी कर बताया कि मनीष पहले से ही मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था और डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि परिजनों द्वारा किए गए अंधविश्वासी कार्यों से अस्पताल प्रबंधन का कोई लेना-देना नहीं है। यह पूरी तरह परिजनों की व्यक्तिगत आस्था पर आधारित था।

पुलिस कर रही है जांच
घटना की जानकारी मिलते ही रिफाइनरी थाने की पुलिस अस्पताल पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

जरूरत है जागरूकता की
यह घटना न केवल चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि समाज में फैले अंधविश्वास और जागरूकता की कमी को भी उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं तभी रुकेंगी जब लोगों को वैज्ञानिक सोच की ओर प्रेरित किया जाएगा और अंधविश्वास के खिलाफ शिक्षित किया जाएगा।

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