पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 15 दिसंबर को आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के दौरान डॉ. नुसरत परवीन का हिजाब हल्के से हटाने की घटना के बाद पैदा हुआ विवाद अब थमता दिख रहा है। राजकीय तिब्बी कॉलेज एवं अस्पताल की डॉ. नुसरत परवीन अपनी नौकरी 20 दिसंबर को जॉइन कर लेंगी और वह मुख्यमंत्री से नाराज नहीं हैं। यह जानकारी कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. (डॉ.) मोहम्मद महफजुर रहमान ने दी।
प्रिंसिपल ने बताया कि डॉ. नुसरत ने अपनी सहेली से बातचीत में साफ कहा है कि वह मुख्यमंत्री से नाराज नहीं हैं और 20 दिसंबर को कॉलेज जॉइन करेंगी। उन्होंने घटना को गलत तरीके से पेश किए जाने की बात कही और स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की मंशा केवल स्नेह और सम्मान की थी, कोई गलत इरादा नहीं था। प्रो. रहमान ने कहा कि मीडिया ने इसे अलग रूप में दिखाया, जबकि महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। कुछ लोग इस मामले को गलत दिशा दे रहे हैं।
डॉ. नुसरत परवीन राजकीय तिब्बी कॉलेज (यूनानी चिकित्सा) से BUMS पूरी करने के बाद पीजी फर्स्ट ईयर की छात्रा हैं। वह पढ़ाई में बेहद होशियार और अनुशासित हैं। पिछले सात वर्षों से वह हमेशा हिजाब में कॉलेज आती रही हैं। कॉलेज के एक शिक्षक ने बताया कि नियुक्ति पत्र मिलने पर वह बहुत खुश थीं, लेकिन घटना के बाद थोड़ी आहत हुईं और पिछले चार दिनों से कॉलेज नहीं आईं।
घटना के दिन मुख्यमंत्री ने डॉ. नुसरत को नियुक्ति पत्र देने के बाद हिजाब की ओर इशारा करते हुए कहा, “हटाइए इसे” और खुद हाथ से हल्का सरका दिया। इस दौरान वह असहज हो गईं और स्टेज पर मौजूद कुछ लोग हंसते नजर आए। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी उन्हें रोकने की कोशिश करते दिखे।
कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। एक छात्र डॉ. ईशर अहमद ने कहा कि हिजाब पहनना निजी फैसला है, इसमें दखल गलत है और मुख्यमंत्री को माफी मांगनी चाहिए। फाइनल ईयर की एक छात्रा ने इसे निजता का उल्लंघन बताया। वहीं, शिक्षक और प्रिंसिपल ने डॉ. नुसरत के उत्कृष्ट अकादमिक रिकॉर्ड और शालीन व्यवहार की तारीफ की।
डॉ. नुसरत और उनके परिवार का अभी तक कोई प्रत्यक्ष बयान नहीं आया है, लेकिन प्रिंसिपल के अनुसार वह जल्द नौकरी जॉइन कर सामान्य रूप से काम शुरू कर देंगी। विवाद के बावजूद कॉलेज प्रशासन का कहना है कि मामला बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।