अगर मेहनत और लगन सच्ची हो, तो भाषा कभी बाधा नहीं बनती—इसी बात को साबित किया है उत्तराखंड की अंकिता कांति ने, जिन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में ऑल इंडिया रैंक 137 प्राप्त कर हिंदी माध्यम की टॉपर बनने का गौरव हासिल किया है। इस बार हिंदी माध्यम से कुल 40 अभ्यर्थियों ने सफलता का परचम लहराया है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
देहरादून की रहने वाली अंकिता का जीवन तमाम संघर्षों से भरा रहा। उनके पिता देवेश्वर कांति एक प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी में गार्ड की नौकरी करते हैं, जबकि मां ऊषा कांति एक साधारण गृहिणी हैं। तीन बहनों में सबसे बड़ी अंकिता ने पढ़ाई के साथ घर की जिम्मेदारियों को भी बखूबी संभाला और आज उसी मेहनत का नतीजा है कि उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा में अपनी जगह बनाई।
शिक्षा और तैयारी
10वीं: दून मॉर्डन स्कूल, तुंतोवाला (देहरादून)
12वीं: संजय पब्लिक स्कूल, कारबारी (96.4% अंक, उत्तराखंड में चौथा स्थान)
B.Sc: DBS कॉलेज
M.Sc (फिजिक्स): DAV कॉलेज
उन्होंने नोएडा में रहकर हिंदी माध्यम से ही UPSC की तैयारी की और इंटरव्यू भी हिंदी में दिया।
परिवार की भूमिका
सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद परिवार ने शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनकी बहन अंजलि कांति पहले ही बैंकिंग सेवा में चयनित हो चुकी हैं, जबकि अनुष्का कांति प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं।
सपना – भारतीय विदेश सेवा (IFS)
एक मॉक इंटरव्यू में अंकिता ने बताया कि उनकी पहली प्राथमिकता भारतीय विदेश सेवा (IFS) है। वे चाहती हैं कि वे भारत का प्रतिनिधित्व वैश्विक मंच पर करें।
हिंदी माध्यम के लिए प्रेरणा
इस साल हिंदी माध्यम से दूसरे स्थान पर रहे रवि राज, जिन्होंने 182वीं रैंक हासिल की। दृष्टि IAS के संस्थापक डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि अंकिता जैसी छात्राएं यह सिद्ध कर रही हैं कि अब भाषा सफलता की राह में रुकावट नहीं है।
प्रेरणा बनीं अंकिता
अंकिता की यह सफलता उन हजारों हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो मानते हैं कि केवल अंग्रेजी माध्यम से ही UPSC में सफलता पाई जा सकती है। उन्होंने यह मिथक तोड़ा और साबित कर दिया कि सपनों को सच करने के लिए आत्मविश्वास, समर्पण और कड़ी मेहनत ही काफी है—भाषा नहीं।