छपरा: भारत-पाकिस्तान सीमा पर पाक गोलीबारी में शहीद हुए BSF के सब इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज को सोमवार को उनके पैतृक गांव नारायणपुर (छपरा) में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। हजारों की भीड़ ने नम आंखों और गर्व से उन्हें अंतिम विदाई दी।
गांव में “भारत माता की जय” और “पाकिस्तान मुर्दाबाद” के नारों से माहौल गूंज उठा। हर चेहरा दुखी था, लेकिन साथ ही देश के इस बहादुर सपूत पर गर्व भी था।
शहीद के बेटे और भाई ने जताया आक्रोश
शहीद के छोटे भाई मोहम्मद असलम ने कहा, “अब वक्त आ गया है कि पाकिस्तान को दुनिया के नक्शे से मिटा दिया जाए। हमारे जवानों की शहादत अब बर्दाश्त नहीं की जा सकती।”
वहीं बेटे इमरान ने रोते हुए कहा, “आई एम प्राउड ऑफ यू पापा। लेकिन मैं चाहता हूं कि सरकार पाकिस्तान को ऐसी सजा दे कि कोई और बेटा अपने पिता को न खोए।” इमरान ने बताया कि उनके पिता ने आखिरी बार कहा था कि उनका पैर आतंकी हमले में घायल हो गया है, लेकिन जब वह जम्मू पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
जनाजे में उमड़ा जनसैलाब, पत्नी बेसुध
शाम 4 बजे जनाजे की नमाज अदा की गई, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। जब शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो पत्नी शाहीन अजिमा बेसुध होकर गिर पड़ीं।
हर तरफ अश्रुधारा के बीच गर्व का माहौल था। पार्थिव शरीर को गांव के आंगन में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां हर व्यक्ति ने सिर झुकाकर श्रद्धांजलि दी।
दिल्ली से पटना, फिर छपरा पहुंचा शव
इम्तियाज का शव पहले दिल्ली से पटना एयरपोर्ट लाया गया। वहां विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव, मंत्री श्रवण कुमार और नितिन नवीन सहित कई नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।
तेजस्वी ने कहा, “SI इम्तियाज ने यह साबित किया है कि देशभक्ति जाति-धर्म से ऊपर होती है।”
सुपुर्द-ए-खाक हुए PAK गोलीबारी में शहीद SI इम्तियाज:भाई बोला- पाकिस्तान को दुनिया के नक्शे से मिटा देना चाहिए; बेटे ने कहा- प्राउड ऑफ यू पापा#Bihar #BiharNews #Chapra #BSF #MdImtiyaz pic.twitter.com/0HkIbNDJJW
— FirstBiharJharkhand (@firstbiharnews) May 12, 2025
18 दिन पहले लौटे थे ड्यूटी पर, अब लौटे तिरंगे में लिपटकर
परिजनों ने बताया कि ईद के मौके पर इम्तियाज घर आए थे और 18 दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे। किसी ने नहीं सोचा था कि अगली बार वह तिरंगे में लिपटे लौटेंगे।
हमले में पहले तो वे घायल थे, लेकिन हालत सामान्य लग रही थी—तभी अचानक शहादत की खबर आई।
पूरा देश आज SI इम्तियाज की बहादुरी को सलाम करता है। लेकिन साथ ही यह सवाल भी खड़ा होता है—कब तक हमारे जवान यूं ही शहीद होते रहेंगे?