नई दिल्ली: फॉर्च्यून खाद्य तेल और कोहिनूर चावल जैसे ब्रांडों की मालिक AWL Agri Business इन दिनों कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव से पैदा हो रही चुनौतियों का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिसका असर खाद्य तेलों की कीमतों पर भी पड़ा है। कंपनी का मानना है कि इस अस्थिरता से निपटने के लिए उसे अपने कारोबार को अधिक विविध बनाना होगा।
खाद्य तेल पर निर्भरता घटाने की रणनीति
AWL Agri अब खाद्य तेल कारोबार पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य अगले दो से तीन वर्षों में अपने कुल बिक्री वॉल्यूम का 30 प्रतिशत हिस्सा फूड और एफएमसीजी उत्पादों से हासिल करना है, जो फिलहाल लगभग 18 प्रतिशत है। कंपनी का मानना है कि चावल, दाल, आटा और अन्य खाद्य उत्पादों का कारोबार खाद्य तेल की तुलना में कम अस्थिर है।
क्यों बढ़ रहा है दबाव?
कंपनी के अनुसार कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर बायोडीजल की मांग बढ़ जाती है, जिससे खाद्य तेलों की उपलब्धता प्रभावित होती है। इसके अलावा पैकेजिंग सामग्री, रसायन और ईंधन जैसी लागतों में भी बढ़ोतरी हो रही है। AWL Agri ने बताया कि कुछ कच्चे तेल से जुड़े इनपुट की लागत में लगभग 20 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
फूड बिजनेस में बड़ा अवसर
कंपनी का मानना है कि भारत में पैकेज्ड खाद्य उत्पादों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। जहां खाद्य तेल का बड़ा हिस्सा पहले से ब्रांडेड और पैकेज्ड है, वहीं चावल, दाल और अन्य स्टेपल उत्पादों का बड़ा बाजार अभी भी खुला है। AWL इसी अवसर का फायदा उठाकर अपने फूड पोर्टफोलियो को मजबूत करना चाहती है।
अधिग्रहण और विस्तार पर जोर
फूड कारोबार को मजबूत करने के लिए कंपनी पहले ही कोहिनूर और चारमीनार जैसे चावल ब्रांड खरीद चुकी है। इसके अलावा हाल में सॉस और कंडिमेंट्स बनाने वाली GD Foods का अधिग्रहण भी किया गया है। कंपनी आगे भी उच्च मार्जिन वाले फूड सेगमेंट में अधिग्रहण के अवसर तलाश रही है।
भविष्य की रणनीति
AWL Agri का मानना है कि खाद्य तेल कारोबार उसे पैमाना और नकदी प्रवाह देता रहेगा, लेकिन भविष्य की स्थिर वृद्धि फूड और एफएमसीजी कारोबार से आएगी। कंपनी का लक्ष्य एक ऐसा पोर्टफोलियो तैयार करना है जो अधिक मुनाफेदार हो और वैश्विक कमोडिटी कीमतों के उतार-चढ़ाव से कम प्रभावित हो।