बिहार: उद्घाटन से पहले ही दरकने लगा स्वास्थ्य केंद्र, भ्रष्टाचार ने फिर दिखाई सच्चाई

Bihar: Health centre started crumbling even before inauguration, corruption again exposed the truth

पटना/मोतिहारी: बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत बद से बदतर होती जा रही है। पूर्वी चंपारण जिले के अरेराज रढिया में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय द्वारा उद्घाटित किया गया हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भ्रष्टाचार का नया उदाहरण बनकर सामने आया है। उद्घाटन के कुछ ही दिन बाद भवन की दीवारों में दरारें पड़ने लगी हैं और गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

19 मई को किया गया था भव्य उद्घाटन
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने 19 मई 2025 को अरेराज रढिया स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का उद्घाटन किया था। उसी मौके पर 11.80 करोड़ की लागत से बने जिले के अन्य 14 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स का वर्चुअल उद्घाटन और 9.42 करोड़ की लागत से बनने वाले 22 उप स्वास्थ्य केंद्रों का शिलान्यास भी किया गया था।

लेकिन भव्य उद्घाटन समारोह के महज कुछ ही दिन बाद जब अधिकारियों ने भवन का निरीक्षण किया तो पाया कि दीवारों में दरारें, दरवाजों की टूट-फूट और अन्य निर्माण खामियां सामने आ रही हैं।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा स्वास्थ्य केंद्र
करीब 70 लाख रुपये की लागत से बना अतिरिक्त उप स्वास्थ्य केंद्र, मलाही में हैंडओवर से पहले ही जगह-जगह दरकने लगा। निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन और स्थानीय विधायक खुद भी दंग रह गए, जब उन्होंने दीवारों में दरारें देखीं।

तत्काल संवेदक एस.के. इंटरप्राइजेज को बुलाया गया, जिसने जल्दबाजी में दरारों की पैचिंग कराई, लेकिन जांच रिपोर्ट में इसे असंतोषजनक बताया गया है।

स्वास्थ्य विभाग को मरीजों की नहीं, भवन निर्माण की चिंता?
स्थानीय लोगों और डॉक्टरों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता मरीजों का इलाज नहीं, बल्कि भवन निर्माण और उसमें होने वाली कमाई है। रिपोर्ट में भी कहा गया है कि निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही बरती गई है।

सिविल सर्जन को सौंपी गई रिपोर्ट
अरेराज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने 26 जून को सिविल सर्जन को लिखित रिपोर्ट सौंपी, जिसमें स्पष्ट किया गया कि संवेदक द्वारा कराई गई मरम्मत गुणवत्तापूर्ण नहीं है और भवन में कई अन्य खामियां भी मौजूद हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में किसी दुर्घटना से बचने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से गुणवत्ता जांच कराई जाए।

बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी हो चुकी है। जब उद्घाटन से पहले ही दीवारें दरकने लगें, तो सवाल सिर्फ संवेदक या इंजीनियर पर नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र और सरकार की जवाबदेही पर उठते हैं।

जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर कब तक “फीता काटने” की राजनीति में जनता की जान के साथ खिलवाड़ होता रहेगा?

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