पटना। बिहार शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए 10 जिलों में चल रहे मध्याह्न भोजन योजना के पायलट प्रोजेक्ट को पूरी तरह बंद कर दिया है। इस प्रोजेक्ट के तहत प्रधानाध्यापक की जगह अन्य शिक्षकों को मिड-डे मील का व्यवस्थापक और सहायक व्यवस्थापक बनाया गया था, ताकि प्रधानाध्यापक पढ़ाई-लिखाई पर पूरा ध्यान दे सकें।
शिक्षा विभाग के निदेशक (मध्याह्न भोजन) विनायक मिश्र ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य अच्छा था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और निकली। समीक्षा में सामने आया कि ज्यादातर व्यवस्थापक व सहायक व्यवस्थापक स्कूल में नियमित रूप से उपस्थित ही नहीं हो रहे थे। उनकी अनुपस्थिति से न सिर्फ मध्याह्न भोजन योजना प्रभावित हुई, बल्कि स्कूलों की पढ़ाई और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां भी बाधित होने लगीं।
निदेशक ने स्पष्ट किया कि पायलट प्रोजेक्ट में भारी अनियमितताएं पाई गई हैं, इसलिए इसे तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। अब जिन 10 जिलों में यह प्रयोग चल रहा था, वहां से इसे पूरी तरह हटा लिया गया है। भविष्य में इस तरह का कोई पायलट प्रोजेक्ट चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
आदेश जारी कर दिया गया है कि सभी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना अब पहले की तरह ही प्रधानाध्यापक या प्रधान शिक्षक के नेतृत्व में विद्यालय प्रबंधन समिति ही संचालित करेगी। शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को इसकी तुरंत अनुपालना करने का निर्देश दिया है।