पटना: बिहार में अब सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों जैसे माननीयों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जांच आम नागरिकों की तरह तय समय-सीमा में पूरी की जाएगी। इस संबंध में पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने सभी जिलों के एसपी को स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए हैं।
एसपी करेंगे खुद मॉनिटरिंग, हर हफ्ते भेजनी होगी रिपोर्ट
डीजीपी के निर्देशों के मुताबिक, इन मामलों की निगरानी की जिम्मेदारी जिला स्तर पर एसपी को दी गई है। एसपी खुद इन केसों की प्रगति पर नजर रखेंगे और हर सप्ताह इनकी रिपोर्ट संबंधित डीआईजी और आईजी को भेजनी होगी। डीआईजी इन रिपोर्टों की समीक्षा कर पुलिस मुख्यालय को अवगत कराएंगे।
जानबूझकर देरी करने वालों पर होगी कार्रवाई
पुलिस मुख्यालय ने चेतावनी दी है कि यदि कोई जांच अधिकारी जानबूझकर जांच में देरी करता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सभी जिलों से उन मामलों की सूची मांगी गई है जो लंबे समय से लंबित हैं, खासकर वे केस जो माननीय जनप्रतिनिधियों से जुड़े हैं और जिन पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं।
किन जिलों में हैं सबसे अधिक मामले?
राज्य के पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर और पूर्णिया जैसे जिलों में माननीयों के खिलाफ सबसे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। पटना हाईकोर्ट भी ऐसे मामलों की निगरानी कर रही है, और विशेष अदालतों को इनके शीघ्र निपटारे के निर्देश दिए गए हैं।
चौंकाने वाले आंकड़े: 45% विधायक और 38% सांसद आरोपी
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के 45% विधायकों और 38% सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ अपराध, चुनावी धोखाधड़ी, और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले सरकार की बड़ी पहल
राज्य सरकार ने साफ किया है कि 2025 के आगामी विधानसभा चुनाव से पहले ऐसे मामलों को निपटाने के लिए ठोस रणनीति पर काम किया जा रहा है। जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह नई व्यवस्था लागू की गई है, ताकि जनता का भरोसा कायम रह सके और भविष्य में ऐसे मामलों को लेकर उठने वाले सवालों से बचा जा सके।