पटना/नई दिल्ली: अपराधियों पर सख्ती और न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने के उद्देश्य से बिहार पुलिस ने एक बड़ी पहल की है। CBI और दिल्ली पुलिस की तर्ज पर अब सभी थानों और न्यायालयों में ‘कोर्ट प्रभारी’ और ‘कोर्ट नायब’ की नियुक्ति की जाएगी। यह व्यवस्था पहले मार्च 2025 में पटना में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई थी, जिसकी सफलता के बाद अब इसे पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी है।
बिहार के 1870 थानों और न्यायालयों में यह व्यवस्था लागू होगी। इससे गवाहों की पेशी और मामलों के निपटारे में उल्लेखनीय तेजी आई है।
अपर पुलिस महानिदेशक पारसनाथ ने बताया कि कोर्ट प्रभारी (इंस्पेक्टर/सब-इंस्पेक्टर रैंक) और कोर्ट नायब (सिपाही रैंक) को कोर्ट के आदेशों—जैसे समन, वारंट, कुर्की आदि—के समय पर निष्पादन की जिम्मेदारी दी गई है। पटना में इस प्रणाली के तहत पिछले वर्ष की तुलना में तीन गुना अधिक गवाहों को कोर्ट में पेश किया गया।
अब तक दर्ज आंकड़े:
- 17,207 पुलिसकर्मी,
- 3,318 डॉक्टर,
- 49,515 अन्य गवाहों की गवाही इस साल दर्ज की जा चुकी है।
यह पहल खासकर डकैती, लूट, अपहरण, आर्म्स एक्ट और मद्य निषेध कानून जैसे मामलों में ट्रायल की गति बढ़ाने में कारगर साबित हो रही है।
स्पीडी ट्रायल के लिए विशेष टीमें गठित:
राज्यभर में डीएसपी से लेकर सब-इंस्पेक्टर स्तर तक की विशेष टीमें बनाई गई हैं। अप्रैल 2025 में 849 नए मामलों को स्पीडी ट्रायल के लिए चिह्नित किया गया है:
- पटना: 40 केस
- गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा: 30-30 केस
- अन्य 31 जिलों से: 20-20 केस
- छोटे 8 जिलों से: 10-10 केस
CID के आईजी दलजीत सिंह ने बताया कि कोर्ट और थानों में आदेशों का समुचित रिकॉर्ड रखा जा रहा है, जिससे निगरानी आसान हुई है और मामलों के निपटारे में तेजी आ रही है।
जनसहयोग की अपील:
यह पहल बिहार पुलिस को अधिक जवाबदेह और जन-हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पहले देरी के चलते कई अपराधी कानूनी शिकंजे से बच जाते थे, लेकिन अब समयबद्ध जांच और ट्रायल से पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिल सकेगा।
नागरिकों से अपील है कि यदि आपके क्षेत्र में कोई आपराधिक गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत नजदीकी थाने या हेल्पलाइन नंबर 112 पर सूचना दें।