क्वेटा में गृहयुद्ध जैसे हालात, बीएलए का कई इलाकों पर कब्जे का दावा

Civil war-like situation in Quetta, BLA claims control over several areas.

क्वेटा। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हालात तेजी से बिगड़ते हुए गृहयुद्ध जैसे बनते नजर आ रहे हैं। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने राजधानी क्वेटा सहित कई प्रमुख इलाकों पर नियंत्रण का दावा किया है। ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ की रिपोर्टों और जारी वीडियो में बीएलए के सशस्त्र लड़ाके क्वेटा की सड़कों और बाजारों में खुलेआम गश्त करते दिखाई दे रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि कई स्थानों पर स्थानीय बलूच जनता द्वारा विद्रोहियों का तालियों के साथ स्वागत किए जाने के दृश्य सामने आए हैं। हालात के दबाव में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के जवानों के चौकियां छोड़ने की खबरें भी हैं, जिसे सरकार और सेना की साख के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

‘ऑपरेशन हीरोफ’ का दूसरा चरण, 10 शहरों में एक साथ हमले
यह कार्रवाई बीएलए के ‘ऑपरेशन हीरोफ’ के दूसरे चरण का हिस्सा बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, विद्रोहियों ने सुनियोजित ढंग से क्वेटा, नोशकी, मस्तुंग, दल्बंदीन, कलात, खारान, ग्वादर, पासनी, टंप और बुलेदा सहित करीब 10 शहरों में एक साथ हमले किए। बीएलए का दावा है कि उसके फिदायीन दस्तों ने पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के ठिकानों को निशाना बनाया और कई इलाकों पर कब्जा कर लिया। क्वेटा में कई पुलिस थानों के नष्ट होने, सरकारी वाहनों के जलने और इमारतों पर बीएलए लड़ाकों की मौजूदगी की खबरें हैं।

ग्वादर तक फैली हिंसा, महिला लड़ाके भी अग्रिम मोर्चे पर
सामरिक और आर्थिक रूप से अहम ग्वादर पोर्ट के आसपास भी संघर्ष की खबरें हैं, जहां बीएलए और सुरक्षा बलों के बीच भारी गोलीबारी जारी बताई जा रही है। इलाके में धमाकों की आवाजें और धुएं के गुबार देखे गए हैं। इस अभियान की खास बात यह बताई जा रही है कि इसमें बीएलए की महिला लड़ाके भी अग्रिम मोर्चे पर तैनात हैं। बलूच नेता सरदार अख्तर मेंगल ने हालात को बेहद गंभीर बताते हुए कहा है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी।

10 जवानों के मारे जाने का दावा, अस्पतालों में इमरजेंसी
संघर्ष में अब तक पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के 10 जवानों के मारे जाने का दावा किया गया है, जबकि जवाबी कार्रवाई में कई बीएलए लड़ाकों के भी हताहत होने की खबरें हैं। क्वेटा में हालात बेकाबू होते देख अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है। प्रशासन ने मोबाइल सेवाएं बंद कर दी हैं और रेल सेवाएं भी निलंबित कर दी गई हैं। खनिज संसाधनों से समृद्ध लेकिन लंबे समय से अशांति और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से जूझ रहे बलूचिस्तान में बीएलए इसे आजादी की लड़ाई करार दे रहा है। जानकारों के अनुसार, विद्रोहियों की इतनी बड़ी संख्या में खुली मौजूदगी पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र की कमजोरी को उजागर करती है और आने वाले दिनों में हिंसा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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