नई दिल्ली: UGC-NET जून 2026 के तहत 30 जून को आयोजित सोशियोलॉजी (Sociology) परीक्षा विवादों में घिर गई है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र में टाइपिंग की गलतियां, हिंदी अनुवाद में त्रुटियां और कुछ सवालों को सिलेबस से बाहर होने का दावा किया है। इसके बाद छात्रों ने परीक्षा की समीक्षा और आवश्यक सुधार की मांग उठाई है।
क्या हैं छात्रों के आरोप?
परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रश्नपत्र में कई जगह वर्तनी संबंधी गलतियां थीं। कुछ प्रसिद्ध समाजशास्त्रियों के नाम भी गलत लिखे गए थे। इसके अलावा हिंदी अनुवाद में त्रुटियां और व्याकरण संबंधी खामियां होने से कई सवाल समझने में परेशानी हुई। छात्रों का यह भी आरोप है कि कुछ प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से मेल नहीं खाते थे, जिससे परीक्षा की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सोशल मीडिया पर उठी समीक्षा की मांग
परीक्षा के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में छात्रों और विषय विशेषज्ञों ने प्रश्नपत्र की समीक्षा की मांग की। कई अभ्यर्थियों ने कहा कि यह केवल टाइपिंग की सामान्य गलती नहीं, बल्कि प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी जांच प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही का संकेत है।
NTA ने क्या कहा?
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसे इस मामले की जानकारी मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया के जरिए मिली है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि टाइपोग्राफिकल (Typographical) गलतियां असामान्य नहीं होतीं, लेकिन उठाई गई शिकायतों की जांच की जा रही है। NTA के अनुसार, फिलहाल छात्रों की ओर से कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
परीक्षा प्रणाली पर फिर उठे सवाल
हाल के वर्षों में विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं को लेकर पारदर्शिता और प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता पर लगातार बहस होती रही है। ऐसे में UGC-NET सोशियोलॉजी पेपर को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर परीक्षा संचालन और गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे क्या हो सकता है?
अब अभ्यर्थियों की नजर NTA की समीक्षा प्रक्रिया पर टिकी है। यदि जांच में प्रश्नपत्र में त्रुटियों की पुष्टि होती है, तो एजेंसी आवश्यक कदम उठा सकती है। फिलहाल NTA ने मामले की जांच जारी होने की बात कही है और किसी अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की है।