पटना/रोहतास/भोजपुर: भ्रष्टाचार को लेकर बदनाम रहने वाला परिवहन विभाग एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार विभाग के सरकारी कर्मियों ने ही सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगा दिया। वाहन मालिकों से टैक्स वसूली करने वाले कर्मी, अब सरकारी खजाने को ही खाली करने में जुटे थे।
ताजा मामला रोहतास जिला परिवहन कार्यालय का है, जहां 2 करोड़ 30 लाख रुपये के गबन का खुलासा हुआ है। इस खुलासे के बाद भोजपुर डीटीओ कार्यालय में भी घोटाले की आशंका को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
4 अगस्त को रोहतास के जिला परिवहन पदाधिकारी रामबाबू ने नगर थाना में एफआईआर दर्ज कराई। आरोप है कि वाहन टैक्स (MV Tax) और ई-चालान के माध्यम से वसूली गई सरकारी राशि को, संबंधित कर्मचारी सरकारी खाते में जमा नहीं कर रहे थे।
इस गड़बड़ी में चार कर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है, जिनमें प्रमुख नाम डाटा एंट्री ऑपरेटर अजय कुमार सिंह का है। उन्होंने इस घोटाले में अपनी गलती स्वीकार करते हुए 15 लाख 99 हजार 75 रुपये जमा किए हैं, लेकिन शेष राशि अभी तक जमा नहीं की गई है।
भोजपुर में भी जांच तेज
गौरतलब है कि आरोपी अजय कुमार सिंह पहले भोजपुर डीटीओ कार्यालय में भी कार्यरत रह चुके हैं। इसी कारण अब भोजपुर कार्यालय में भी पूरा लेखा-जोखा खंगाला जा रहा है।
भोजपुर के जिला परिवहन पदाधिकारी मोइज ज़िया ने कहा,
“हम बैंक से जानकारी मंगवा रहे हैं और दो माह की अवधि का मिलान करा रहे हैं। अगर कोई गड़बड़ी सामने आती है तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।”
सरकार की सख्ती और सवाल
नीतीश सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति के बावजूद सरकारी कर्मचारियों द्वारा इस तरह से करोड़ों की सरकारी राशि का गबन किया जाना गंभीर चिंता का विषय है। यह मामला बताता है कि सिस्टम में पारदर्शिता और निगरानी की भारी कमी है।
अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या अन्य जिलों के परिवहन कार्यालयों में भी इसी तरह के घोटाले हो रहे हैं? आने वाले दिनों में अन्य जिलों में भी इसी तरह की ऑडिट और छापेमारी हो सकती है।
निष्कर्ष
परिवहन विभाग में यह मामला केवल एक घोटाले की कहानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता को उजागर करता है। ऐसे में जरूरत है सख्त निगरानी, जवाबदेही और दोषियों पर त्वरित कानूनी कार्रवाई की – ताकि जनता के पैसे से हो रहा यह ‘आंतरिक लूटतंत्र’ रोका जा सके।