देहरादून: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जन्मदिन पर देहरादून में एक भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान के दृष्टिबाधित छात्रों ने जब उन्हें बॉलीवुड का मशहूर गीत ‘बार-बार ये दिन आए’ गाकर जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं, तो राष्ट्रपति अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकीं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
राष्ट्रपति तीन दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून पहुंची हैं और अपने 20 जून के जन्मदिन पर उन्होंने दिव्यांग बच्चों के साथ समय बिताया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों की ओर से दी गई इस संवेदनशील प्रस्तुति ने राष्ट्रपति को गहराई से छू लिया। मंच पर मौजूद सुरक्षाकर्मी ने उन्हें टिश्यू पेपर दिया, जिससे उन्होंने अपने आंसू पोंछे। यह मानवीय क्षण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे ‘दिल छू लेने वाला पल’ बता रहे हैं।
देशभर से मिली शुभकामनाएं
राष्ट्रपति मुर्मू को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सहित कई गणमान्य नेताओं ने जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।
उपराष्ट्रपति धनखड़ ने लिखा:
“विनम्र शुरुआत से लेकर सर्वोच्च संवैधानिक पद तक की उनकी यात्रा हमारे लोकतंत्र की सच्ची भावना का प्रतीक है। उन्होंने सेवा, सादगी और गरिमा की मिसाल कायम की है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने पोस्ट किया:
“उनका जीवन और नेतृत्व करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा है। सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के लिए उनकी प्रतिबद्धता देश के लिए आशा की किरण है। ईश्वर उन्हें दीर्घायु और स्वस्थ जीवन प्रदान करें।”
एक प्रेरणादायक जीवन यात्रा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के एक छोटे से गांव उपरबेड़ा में हुआ था। वह संथाल जनजाति से संबंध रखती हैं और एक साधारण परिवार से निकलकर भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनीं।
उनके पिता बिरंची नारायण टुडू गांव के मुखिया थे और पंचायती व्यवस्था से जुड़े थे। अपने जीवन में उन्होंने कई संघर्षों और व्यक्तिगत दुखों के बावजूद जनसेवा की राह नहीं छोड़ी और आज भी उनका जीवन करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।