नई दिल्ली/पटना: भारत निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2019 से निष्क्रिय रहे और जिनका देशभर में कोई भौतिक कार्यालय मौजूद नहीं है, ऐसे पंजीकृत गैरमान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) के खिलाफ डीलिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इस कार्रवाई के तहत आयोग ने संबंधित दलों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं ताकि वे अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकें। तथ्यों की जांच के बाद ही किसी भी दल को पंजीकरण सूची से हटाने का अंतिम निर्णय आयोग द्वारा लिया जाएगा।
निष्क्रियता और गैर-मौजूदगी बनी कार्रवाई का आधार
भारत निर्वाचन आयोग की जांच में यह सामने आया कि कई RUPPs ने 2019 के बाद लोकसभा, विधानसभा या उपचुनावों में भाग नहीं लिया और उनका कोई सक्रिय कार्यालय या संगठनात्मक ढांचा भी नहीं है। ऐसे दलों को अनुचित रूप से डीलिस्ट न किया जाए, इसके लिए आयोग ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने और संबंधित दलों को सुनवाई का अवसर देने का निर्देश दिया है।
पटना में 5 दलों को नोटिस, 24 घंटे में मांगा जवाब
पटना जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने जिले में मौजूद 5 गैरमान्यता प्राप्त दलों को निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन विभाग द्वारा जारी नोटिस की विधिवत तामिला कराते हुए 24 घंटे के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। यदि किसी कारणवश नोटिस की तामिला संभव नहीं हो पाती है, तो संबंधित अधिकारी को उसका स्पष्ट प्रतिवेदन देना अनिवार्य होगा।
पटना जिले में नोटिस प्राप्त RUPPs की सूची:
| पार्टी का नाम | पंजीकृत पता | नोटिस तामिला अधिकारी |
|---|
| Bhartiya Yuva Janshakti Party | रोज़ी अनीमा, XTTI, अखंड ज्योति अस्पताल के पास, दीघा, पटना | कार्यपालक पदाधिकारी, पाटलिपुत्रा अंचल |
| Ekta Vikas Mahasabha Party | सिंहा सदन, एलसीटी घाट, ईस्ट मैनिपुरा, थाना-पाटलिपुत्र कॉलोनी, पटना | कार्यपालक पदाधिकारी, पाटलिपुत्रा अंचल |
| Garib Janta Dal (Secular) | साकेत विहार, अनिसाबाद, वार्ड संख्या 11, हाउस नं 470, पटना-2 | कार्यपालक पदाधिकारी, नूतन राजधानी अंचल |
| Rastriya Sadabahar Party | तुलसी मंडी, होटल महारानी, आलमगंज, गुलजारबाग, पटना सिटी | अवर निर्वाचन पदाधिकारी, पटना सिटी |
| Young India Party | आर्य कुमार रोड, मछुआटोली, थाना-कदमकुआं, पटना |
डीलिस्टिंग से पहले सुनवाई का अवसर
निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया है कि किसी भी दल को बिना उचित प्रक्रिया के डीलिस्ट न किया जाए। सभी संबंधित दलों को नोटिस का जवाब देने और अपनी सक्रियता सिद्ध करने का मौका मिलेगा। अंतिम निर्णय आयोग द्वारा तथ्यों की जांच के बाद ही लिया जाएगा।
कानूनी आधार
भारत में राष्ट्रीय, राज्य और गैरमान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों का पंजीकरण जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A के तहत किया जाता है। आयोग की यह कार्रवाई वही दल बनाए रखने के उद्देश्य से है जो वास्तव में सक्रिय और पारदर्शी रूप से कार्य कर रहे हैं।
यह पहल राजनीतिक प्रक्रिया की पारदर्शिता, जवाबदेही और सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।