मुंबई: पूर्व SEBI (सेबी) चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रविवार को मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने माधबी बुच समेत पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ स्टॉक फ्रॉड और नियामक उल्लंघन के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) को इस मामले में केस दर्ज करने और 30 दिनों के भीतर जांच की स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश भी दिया है।
पत्रकार ने लगाया था आरोप
यह मामला एक पत्रकार द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है, जिसमें उन्होंने कहा कि आरोपी अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी, नियामक उल्लंघन और भ्रष्टाचार में संलिप्त होकर एक कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज पर फर्जी तरीके से लिस्ट करवाया। यह काम SEBI अधिनियम, 1992 और इसके नियमों का पालन किए बिना किया गया था। अदालत ने इसे गंभीर मामला बताते हुए जांच की जरूरत जताई और कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों और SEBI की निष्क्रियता के कारण न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी हो गया है।
भारत की पहली महिला SEBI चेयरपर्सन
माधबी पुरी बुच भारत की पहली महिला SEBI चेयरपर्सन थीं, जिनका तीन साल का कार्यकाल पिछले शुक्रवार को समाप्त हुआ। उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए थे, जैसे इक्विटी सेटलमेंट को तेज करना, FPI डिस्क्लोजर को बढ़ाना, और म्यूचुअल फंड की पैठ को 250 रुपये SIP के जरिए बढ़ाना।
हिंडनबर्ग का आरोप
माधबी पुरी बुच के कार्यकाल के आखिरी साल में विवाद तब बढ़ा, जब हिंडनबर्ग रिसर्च और कांग्रेस पार्टी ने उन पर आरोप लगाए। अगस्त 2023 में, हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया कि माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच ने ऑफशोर एंटिटीज में निवेश किया था, जिनमें अडानी ग्रुप के संस्थापक गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी का भी निवेश था। हिंडनबर्ग ने दावा किया कि इससे SEBI की जांच प्रभावित हुई। हालांकि, बुच दंपति ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह निवेश SEBI में शामिल होने से पहले किया गया था और सभी डिस्क्लोजर नियमों का पालन किया गया था।