बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत राशि लेने के बावजूद 387 लाभार्थी जिले से गायब पाए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इन लाभार्थियों ने न तो अब तक अपने आवास का निर्माण शुरू किया है और न ही ग्रामीण विकास विभाग द्वारा भेजे गए नोटिस का कोई जवाब दिया है। मामले के सामने आने के बाद विभाग ने इनकी तलाश तेज कर दी है और कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है।
यह मामला उस समय उजागर हुआ, जब विभागीय कर्मचारियों ने योजना के तहत चयनित लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन किया। जांच के दौरान जब अधिकारी लाभार्थियों के दिए गए पते पर पहुंचे, तो कई जगहों पर न तो संबंधित व्यक्ति मिले और न ही उनके बारे में कोई ठोस जानकारी मिल सकी। इसके बाद विभाग की ओर से नोटिस जारी किए गए, लेकिन अब तक किसी भी लाभार्थी ने जवाब नहीं दिया है।
आंकड़ों के मुताबिक, गायब लाभार्थियों में से 77.26 प्रतिशत यानी 299 लाभुक सिर्फ चार प्रखंडों—पारू, औराई, कटरा और गायघाट—से हैं। इनमें सबसे ज्यादा 92 लाभार्थी पारू प्रखंड से गायब पाए गए हैं। औराई प्रखंड में 75, कटरा में 67 और गायघाट में 65 लाभार्थियों का कोई सुराग नहीं मिला है। इसके अलावा शेष 88 लाभार्थी सकरा, मड़वन, बंदरा, साहेबगंज, कुढ़नी, मीनापुर और मोतीपुर प्रखंडों से संबंधित हैं।
ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, करीब 232 लाभार्थियों (लगभग 60 प्रतिशत) का चयन वित्तीय वर्ष 2020-21 में किया गया था। वहीं 97 लाभुकों (25 प्रतिशत) का चयन 2019-20 में हुआ था, जबकि शेष 15 प्रतिशत लाभार्थी 2018-19 या उससे पहले चयनित किए गए थे। विभाग का यह भी कहना है कि लगभग 32 प्रतिशत यानी 124 लाभार्थी रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों में पलायन कर चुके हैं।
इसके अलावा, 50 से अधिक लाभार्थियों की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके नाम अब तक लाभार्थी सूची से हटाए नहीं जा सके हैं। डीआरडीए निदेशक संजय कुमार ने बताया कि जो लाभार्थी नोटिस का जवाब नहीं दे रहे हैं, उनके खिलाफ नाम सूची से हटाने, ली गई राशि की वसूली, एफआईआर दर्ज कराने और अन्य कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।