भारत और चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने का लिया फैसला

India and China decided to resume Kailash Mansarovar Yatra

नई दिल्ली/बीजिंग:भारत और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद में पिछले वर्ष हुई बैठकों का अब सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। विवादित स्थल से दोनों सेनाओं के पीछे हटने के बाद, अब दोनों देशों ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने का ऐलान किया है। सोमवार को भारत और चीन ने संयुक्त रूप से इस यात्रा को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है, जो दोनों देशों के बीच अच्छे द्विपक्षीय संबंधों और श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने इस निर्णय की जानकारी दी।

यात्रा कब से शुरू होगी?
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में बताया गया कि 2025 की गर्मियों में कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू होगी। दोनों देशों के विशेषज्ञ इस यात्रा के संचालन के लिए मौजूदा समझौतों के अनुसार तरीका तय करेंगे। इसके अलावा, हाइड्रोलॉजिकल डेटा और सीमा पार नदियों से संबंधित सहयोग को फिर से शुरू करने पर भी चर्चा की जाएगी।

कैसे पहुंचेगी कैलाश मानसरोवर?
बैठक में सीधी हवाई सेवाएं फिर से शुरू करने पर भी सैद्धांतिक सहमति बनी। इसके तहत, भारत में रहने वाले श्रद्धालु चीन की फ्लाइट से सीधे कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि 2020 में भारत-चीन सीमा विवाद के बाद इस यात्रा को रोक दिया गया था। लेकिन अब दोनों देशों के विदेश सचिवों के बीच दो दिन तक चली बातचीत के बाद यात्रा को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

बेहतर संबंधों की दिशा में कदम
यह निर्णय भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री के बीजिंग दौरे के दौरान लिया गया। यह वार्ता भारत और चीन के विदेश सचिव-उप विदेश मंत्री तंत्र के तहत हुई। इसके पहले, अक्टूबर में कजान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हुई थी, जिसमें दोनों देशों ने संबंधों को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाने पर सहमति जताई थी।

चीन के कब्जे में कैलाश मानसरोवर का बड़ा हिस्सा
कैलाश मानसरोवर का अधिकांश हिस्सा चीन के कब्जे में है। इसलिए, इस यात्रा पर जाने के लिए चीन से अनुमति लेना जरूरी होता है। हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत को भगवान शिव के निवास स्थान के रूप में पूजा जाता है, जिससे यह स्थान हिंदुओं के लिए अत्यंत पवित्र है।

2020 से पहले, हर साल हजारों लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाते थे, लेकिन अब चीन और भारत के बीच फिर से वार्ता और समझौते के बाद यह यात्रा एक बार फिर शुरू होगी।’

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