उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन कर जैसलमेर के जलालुद्दीन ने सबको चौंकाया, कहा – “मुझे चुनाव लड़ने का शौक है”

Jalaluddin of Jaisalmer surprised everyone by nominating for the post of Vice President, said – "I am fond of contesting elections"

जैसलमेर: लोकतंत्र में हर नागरिक को चुनाव लड़ने का अधिकार है, लेकिन राजस्थान के जैसलमेर निवासी जलालुद्दीन ने इसे अपना जुनून बना लिया है। 38 वर्षीय यह शख्स एक छात्र है और उसने इस बार सीधे देश के उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन दाखिल कर सबको हैरान कर दिया है। जलालुद्दीन ने नामांकन के साथ 15 हजार रुपये की जमानत राशि भी जमा करवाई है।

जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने उपराष्ट्रपति पद के लिए क्यों पर्चा भरा, तो उन्होंने सादगी से जवाब दिया,

“मुझे चुनाव लड़ने का शौक है।”
जलालुद्दीन हर स्तर के चुनाव में भाग लेने की कोशिश करते हैं। उन्होंने बताया कि वे कभी यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में भी उतरना चाहते थे, लेकिन उम्र सीमा पार होने की वजह से नामांकन खारिज कर दिया गया।

यह पहला मौका नहीं है जब उन्होंने चुनावी मैदान में उतरने की कोशिश की हो। जलालुद्दीन 2009 में वार्ड पंच का चुनाव लड़ चुके हैं, जिसमें वे महज एक वोट से हार गए थे। इसके बाद उन्होंने 2013 में विधानसभा और 2014 में लोकसभा चुनाव के लिए भी नामांकन दाखिल किया, लेकिन बाद में पर्चा वापस ले लिया।

इस बार उपराष्ट्रपति पद के लिए उनके द्वारा भरे गए नामांकन पत्र में एक तकनीकी त्रुटि पाई गई है। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, इस खामी के चलते उनका नामांकन रद्द किया जाएगा।

हालांकि उनका पर्चा भले ही खारिज हो जाए, लेकिन चुनाव लड़ने के प्रति उनकी लगन और जज्बा लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। जैसलमेर के इस जुनूनी उम्मीदवार ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में सपने देखने और उन्हें हकीकत में बदलने की कोशिश करने का हक हर किसी को है।

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