- दो केंद्रीय मंत्रियों एवं डिप्टी सीएम लखीसराय से होने के बावजूद जाम की समस्या से निजात का कोई रोड मैप नहीं
- रिपोर्ट: सरफ़राज़ आलम
लखीसराय: 3 जुलाई वर्ष 1994 को मुंगेर से अलग होकर जिला बना लखीसराय को अब तक जाम से निजात नहीं मिल पायी है।लखीसराय विधानसभा क्षेत्र के तत्कालीन विधायक कृष्णचंद्र प्रसाद सिंह के विशेष पहल पर तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने लखीसराय को जिला घोषित किया था। परंतु 31 वर्ष बीत जाने के बाद भी लखीसराय शहर को जाम से मुक्ति नहीं मिली है।प्रतिदिन लखीसराय शहर जाम से कराहता रहता है और शहर में पूरे दिन वाहन रेंगते रहते हैं।
शहर में जाम की समस्या थमने का नाम नहीं ले रहा है।आए दिन जाम से दो-चार हो रहे शहर के लोगों की मुश्किलें,स्कूल और ऑफिस टाइम में जाम के चलते लगभग हर रोज बढ़ जाती हैं।शहर के लिए नासूर बनती जा रही इस समस्या पर प्रशासनिक कोशिशों का मरहम बेअसर साबित हो रहा है।
समाजसेवियों का मानना है कि लखीसराय से नरेंद्र मोदी सरकार के दो केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह तथा गिरिराज सिंह एवं बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा जैसे महान राजनीतिक शख्सियत के बावजूद तनिक भी लखीसराय शहर को जाम से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है जो अफसोसजनक है।
ज्ञात हो कि बेतरतीब पार्किंग और सड़कों पर अतिक्रमण जाम की समस्या की प्रमुख वजह बने रहते है।कुछ माह पूर्व में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान जाम की समस्या के लिहाज से खास असर नहीं देखा जा रहा है।आम लोगों की माने तो इस पर जिला प्रशासन को अविलंब संज्ञान लेना चाहिए।समाज के बड़े तबके ने लखीसराय जिले के डीएम मिथिलेश मिश्र तथा पुलिस अधीक्षक अजय कुमार से लखीसराय शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए विशेष पहल की मांग की है।