लोकायुक्त की रिपोर्ट में कर्नाटक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनकी पत्नी को बड़ी राहत, MUDA जमीन घोटाले में जांच का कोई अपराधी सबूत नहीं

Lokayukta report gives big relief to Karnataka CM Siddaramaiah and his wife, no criminal evidence found in MUDA land scam investigation

बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनकी पत्नी बीएम पार्वती को मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) जमीन घोटाले में लोकायुक्त से बड़ी राहत मिली है। बुधवार को लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मुख्यमंत्री और अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं। लोकायुक्त ने स्पष्ट किया कि इस मामले में लगाए गए आरोप “आपराधिक नहीं, बल्कि नागरिक प्रकृति” के लगते हैं, और इसलिए इनके खिलाफ क्रिमिनल केस चलाने के लायक सबूत नहीं मिले।

MUDA जमीन घोटाले का मामला
यह मामला मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी बीएम पार्वती को कुछ महंगे प्लॉट्स आवंटित किए जाने से जुड़ा है। आरोप था कि पार्वती को मैसूर के एक पॉश इलाके में महंगे प्लॉट्स आवंटित किए गए, जबकि उनकी जमीन शहर के बाहरी इलाके में स्थित थी। इस डील से राज्य को करीब 45 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इस मामले के खिलाफ तीन भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत को पत्र लिखा था और सिद्धारमैया के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। राज्यपाल ने इस मामले की मंजूरी दी, जिसके बाद इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। कर्नाटक हाई कोर्ट ने सितंबर में राज्यपाल के फैसले को सही ठहराया और इसके बाद सिद्धारमैया के खिलाफ केस दर्ज किया गया।

लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट
लोकायुक्त पुलिस ने शिकायतकर्ता स्नेहमयी कृष्णा को नोटिस जारी कर बताया कि सिद्धारमैया, उनकी पत्नी, साले मल्लिकार्जुन स्वामी और जमीन मालिक देवराजू के खिलाफ आरोप साबित नहीं हो सके। इसलिए इस मामले की अंतिम रिपोर्ट हाई कोर्ट को सौंपी जाएगी। हालांकि, लोकायुक्त ने यह भी कहा कि 2016 से 2024 तक MUDA द्वारा किए गए मुआवजे वाले प्लॉट आवंटनों की जांच जारी रहेगी और इस पर एक अलग से रिपोर्ट दी जाएगी। इसके अलावा, प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग केस अभी भी सक्रिय है, जिससे सिद्धारमैया को भविष्य में कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

राजनीतिक विवाद और विपक्षी दलों के हमले
इस मामले ने कर्नाटक की राजनीति में भारी उथल-पुथल मचा दी थी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने सिद्धारमैया के इस्तीफे की मांग की और इसे सत्ता के दुरुपयोग का मामला बताया। विपक्षी दल इस केस की सीबीआई से जांच कराने की मांग कर रहे थे, लेकिन राज्य सरकार ने यह कहते हुए CBI को आम सहमति देने से इनकार कर दिया कि एजेंसी पक्षपाती है।

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