पटना—बिहार में आर्थिक अपराधों के खिलाफ वर्ष 2026 में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने सख्त रुख अपनाया है। परीक्षा घोटालों से लेकर सरकारी धन के गबन, खनन और जीएसटी फर्जीवाड़े तक, हर स्तर पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
ईओयू में तैनात अधिकारी पंकज कुमार के अनुसार, सबसे बड़ी कार्रवाई परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी को लेकर हुई। SCERT से जुड़ी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक मामले में एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया गया। आरोपी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए छात्रों से पैसे लेकर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराते थे। यह मामला बताता है कि अपराधी अब तकनीक का इस्तेमाल कर शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं, लेकिन पुलिस भी उसी स्तर पर जवाब दे रही है।
आय से अधिक संपत्ति के मामलों में भी ईओयू ने सख्ती दिखाई है। एक कार्यपालक अभियंता के खिलाफ 62 प्रतिशत से अधिक अवैध संपत्ति पाए जाने पर केस दर्ज कर छापेमारी की गई। यह कार्रवाई सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
खनन क्षेत्र में भी बड़ा घोटाला सामने आया है। सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर OTP सिस्टम को बायपास करते हुए सैकड़ों लाइसेंसधारियों ने अवैध खनन किया, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले में दर्ज कई प्राथमिकी इस बात की पुष्टि करती हैं कि यह एक संगठित नेटवर्क था।
इसके अलावा, सहकारिता बैंकों में 100 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले ने वित्तीय व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया है। फर्जी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) पॉलिसियों के आधार पर लोन पास कर आम लोगों के पैसे का गबन किया गया। हालांकि, कई आरोपियों की गिरफ्तारी से जांच एजेंसियों की सक्रियता भी सामने आई है।
बैंक-डाक विभाग घोटाले और जीएसटी फर्जीवाड़े के मामलों में भी कार्रवाई करते हुए वर्षों से फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही, सरकारी टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए विशेष टीम का गठन किया गया है, जिससे भविष्य में ऐसे घोटालों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।