नई दिल्ली : फर्जी डिप्लोमेटिक नंबर प्लेट मामले में चैतन्यानंद सरस्वती को जमानत, पुलिस जांच पर अदालत की कड़ी टिप्पणी

New Delhi: Chaitanyanand Saraswati granted bail in the fake diplomatic number plate case; court makes strong remarks on police investigation.

दिल्ली की पटियाला हाउस स्थित जिला अदालत ने फर्जी डिप्लोमेटिक नंबर प्लेट लगाने के मामले में आरोपी चैतन्यानंद सरस्वती को बड़ी राहत देते हुए जमानत मंजूर कर ली है। हालांकि, इस मामले में जमानत मिलने के बावजूद स्वामी चैतन्यानंद फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे, क्योंकि उनके खिलाफ छात्राओं से छेड़छाड़ से जुड़ा एक गंभीर मामला भी दर्ज है। सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठाते हुए जांच को बेहद लापरवाह बताया।

चार्जशीट को बताया गैर-गंभीर
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिमेश कुमार ने कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट बेहद गैर-गंभीर तरीके से तैयार की गई है। अदालत ने जांच में कई खामियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि चार्जशीट से यह स्पष्ट नहीं होता कि फर्जी नंबर प्लेट खुद आरोपी ने लगवाई थी या उसने स्वयं कार पर लगाई थी। कोर्ट ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि जिस ड्राइवर ने कथित रूप से कार पर फर्जी नंबर प्लेट लगाई थी, उसे पुलिस ने आरोपी नहीं बनाया। इसके अलावा, नंबर प्लेट के निर्माण के स्रोत की भी कोई जांच नहीं की गई और यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि आरोपी स्वयं उस कार का इस्तेमाल कर रहा था या नहीं।

पुलिस की लापरवाही का खामियाजा आरोपी नहीं भुगत सकता
जमानत देते हुए अदालत ने कहा कि इस मामले में अधिकतम सजा सात साल तक की हो सकती है। चूंकि जांच पूरी हो चुकी है, इसलिए आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस की लापरवाही का खामियाजा किसी व्यक्ति को कैद में रखकर नहीं चुकाया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने इस मामले में आरोपी को जमानत देने का फैसला सुनाया।

क्या है पूरा मामला
यह मामला 25 अगस्त 2025 को दर्ज किया गया था, जब आरोपी से जुड़ी बताई जा रही एक वोल्वो कार पर ‘39 UN 1’ नंबर की फर्जी डिप्लोमेटिक नंबर प्लेट पाई गई थी। स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती पर फिलहाल कई गंभीर आरोप हैं। उनके खिलाफ छात्राओं से छेड़छाड़, ट्रस्ट के जरिए हर महीने करीब 40 लाख रुपये की कथित हेराफेरी और फर्जी नंबर प्लेट लगाने समेत कुल पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन्हीं मामलों के चलते एक केस में जमानत मिलने के बावजूद उनकी रिहाई फिलहाल संभव नहीं हो सकी है।

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