नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव की मुश्किलें फिर से बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को आईआरसीटीसी घोटाले में तीनों के खिलाफ आरोप तय कर दिए।
विशेष सीबीआई अदालत ने अपने फैसले में कहा कि लालू यादव ने टेंडर प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया और नियमों में बदलाव करवाया, जिससे भ्रष्टाचार और साजिश के सबूत मिले। कोर्ट ने माना कि यह सब लालू यादव की जानकारी और सहमति से हुआ। विशेष जज विशाल गोगने ने सुनवाई के दौरान कहा कि लालू ने सरकारी पद का दुरुपयोग किया। कोर्ट ने लालू, राबड़ी और तेजस्वी के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं के तहत आरोप तय किए।
सुनवाई के लिए लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए। लालू यादव व्हीलचेयर पर कोर्ट पहुंचे। कोर्ट ने सभी आरोपियों की उपस्थिति को अनिवार्य बताया था।
आईआरसीटीसी घोटाले में आरोप है कि लालू यादव के रेलमंत्री रहते हुए रांची और पुरी के बीएनआर होटल के टेंडर में अनियमितताएं हुईं। इन होटलों को निजी कंपनी को देने के बदले लालू परिवार से जुड़ी कंपनियों को जमीनें दी गईं। सीबीआई ने इस मामले में लालू, राबड़ी, तेजस्वी और अन्य आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था।
लैंड फॉर जॉब केस में 25 अगस्त 2025 को हुई पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें और सबूतों की समीक्षा के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। आज इस मामले में भी आरोप तय किए गए।
इस बीच, बिहार की सियासत में इस फैसले से हलचल मच गई है। महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर आरजेडी और कांग्रेस के बीच तनातनी चल रही है। आरजेडी ने कांग्रेस को 52 सीटों का प्रस्ताव दिया है, जबकि कांग्रेस 60 सीटों की मांग कर रही है। आज दिल्ली में कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक भी होनी है, जो बिहार महागठबंधन के लिए अहम मानी जा रही है।
फिलहाल, लालू यादव और तेजस्वी यादव दिल्ली में मीसा भारती के पंडारा पार्क स्थित आवास पर ठहरे हैं। कोर्ट के फैसले के बाद अगली सुनवाई की तारीख तय होगी।