बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने गुरुवार (5 मार्च) को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इसके साथ ही यह लगभग तय हो गया है कि वह राज्यसभा के सदस्य बनेंगे। इस कदम के साथ ही उनका एक बड़ा राजनीतिक सपना भी पूरा होने जा रहा है, क्योंकि वह बिहार की राजनीति में ऐसे चुनिंदा नेताओं में शामिल हो जाएंगे जो चारों सदनों—विधानसभा, लोकसभा, विधान परिषद और राज्यसभा—के सदस्य रह चुके हैं।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर काफी लंबा और अनुभवों से भरा रहा है। उन्होंने वर्ष 1985 में पहली बार विधायक (MLA) के रूप में राजनीति में कदम रखा था। इसके बाद 1989 में वे पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए। वर्ष 2005 से वह बिहार विधान परिषद (MLC) के सदस्य हैं और अब 2026 में राज्यसभा पहुंचने के साथ उनका यह अनोखा रिकॉर्ड पूरा हो जाएगा। इससे पहले उन्हें राज्यसभा में जाने का अवसर नहीं मिला था।
बिहार में उनसे पहले केवल तीन नेताओं ने ही चारों सदनों का सदस्य बनने का यह रिकॉर्ड बनाया है। इनमें Lalu Prasad Yadav, दिवंगत पूर्व उपमुख्यमंत्री Sushil Kumar Modi और Upendra Kushwaha शामिल हैं।
लालू प्रसाद यादव ने 1977 में पहली बार लोकसभा सदस्य के रूप में राजनीति में प्रवेश किया था। इसके बाद 1980 से 1989 तक वे बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। वर्ष 1990 से 1995 तक उन्होंने विधान परिषद में सदस्य के रूप में कार्य किया और अप्रैल 2000 में राज्यसभा पहुंचे।
वहीं सुशील कुमार मोदी ने 1990 में पहली बार विधायक के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। 2004 में वे भागलपुर से लोकसभा सांसद बने। इसके बाद 2005 में विधान परिषद के सदस्य बने और 2020 में राज्यसभा के लिए चुने गए।
इसी तरह राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने 2000 में पहली बार विधायक के रूप में राजनीति में प्रवेश किया। 2010 में वे राज्यसभा पहुंचे, 2014 में लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने और 2021 में बिहार विधान परिषद के सदस्य चुने गए। वर्तमान में वे राज्यसभा सदस्य हैं और 2026 के चुनाव में एनडीए समर्थित उम्मीदवार के रूप में फिर से नामांकन दाखिल कर चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नीतीश कुमार का चारों सदनों का सदस्य बनना बिहार की राजनीति में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और विभिन्न स्तरों पर जनसेवा के सफर को दर्शाता है। राज्यसभा में उनकी मौजूदगी से बिहार की राजनीति में नए समीकरण और बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं।
इस उपलब्धि के साथ नीतीश कुमार का नाम उन चुनिंदा नेताओं में दर्ज हो जाएगा जिन्होंने राज्य और केंद्र की राजनीति के लगभग सभी प्रमुख संसदीय सदनों में प्रतिनिधित्व किया है।