पद्म पुरस्कार से सम्मानित कृषि वैज्ञानिक डॉ. गोपालजी त्रिवेदी का निधन, बिहार में शोक की लहर

Padma Award-honored agricultural scientist Dr. Gopalji Trivedi passes away; wave of mourning sweeps across Bihar.

पटना: शिक्षा और कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पद्म पुरस्कार से सम्मानित डॉ. गोपालजी त्रिवेदी का निधन हो गया। उन्होंने पटना स्थित मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस ली। जानकारी के अनुसार सांस लेने में तकलीफ होने के बाद उन्हें दो दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 93 वर्ष की उम्र में उनके निधन की खबर से मुजफ्फरपुर समेत पूरे बिहार में शोक की लहर फैल गई है।

डॉ. गोपालजी त्रिवेदी को हाल ही में भारत सरकार की ओर से कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वे मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड के मतलुपुर गांव के निवासी थे। इसी वर्ष 25 जनवरी को उनके नाम की घोषणा पद्म सम्मान के लिए की गई थी। वे डॉ. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के पूर्व कुलपति भी रह चुके थे।

15 फरवरी 1930 को जन्मे डॉ. त्रिवेदी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने पूसा से आगे की पढ़ाई की और इंटरमीडिएट की शिक्षा मुजफ्फरपुर के एलएस कॉलेज से पूरी की। उन्होंने भागलपुर के सबौर कृषि महाविद्यालय से बीएससी एग्रीकल्चर और पोस्ट ग्रेजुएशन किया। बाद में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) से पीएचडी की उपाधि हासिल की।

साल 1961 में उन्होंने तिरहुत कृषि महाविद्यालय, ढोली में प्रोफेसर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। बाद में वे राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय में निदेशक बने और वर्ष 1988 से 1992 तक कुलपति के पद पर कार्यरत रहे। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई।

डॉ. त्रिवेदी ने अपने गांव में लीची उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आधुनिक खेती, विंटर मक्का और मत्स्यपालन आधारित कृषि प्रणाली को प्रोत्साहित किया। उन्होंने किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि भारत गांवों का देश है और गांवों को मजबूत करना ही उनके जीवन का सबसे बड़ा संकल्प रहा।

डॉ. गोपालजी त्रिवेदी का निधन बिहार के कृषि और शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

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