बिहार में ठंड शुरू होते ही पटना की हवा जहरीली हो गई है। मंगलवार को समनपुरा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 334 तक पहुंच गया, जो रेड जोन में आता है। हाल के दिनों में शहर का औसत AQI 196 रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के मुताबिक, दानापुर में 213, मुरादपुर में 182, राजवंशी नगर में 172, तारामंडल में 161 और शेखपुरा में 115 AQI दर्ज किया गया। PM2.5 का स्तर मानकों से कई गुना ऊपर है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान गिरने से हवा ठंडी और भारी होकर नीचे बैठ जाती है, जिससे उसकी गति कम हो जाती है। सर्दी में नमी कम होने से प्रदूषक कण आपस में चिपककर जमीन पर नहीं गिर पाते और हवा में तैरते रहते हैं। निर्माण कार्यों की धूल, वाहनों का धुआं और सड़कों पर जमी मोटी धूल की परत – खासकर समनपुरा जैसे इलाकों में सफाई की कमी से – प्रदूषण को और बढ़ा रही है।
इससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। डॉक्टरों ने मास्क पहनने और बाहर कम निकलने की सलाह दी है। सरकार ने निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है और पानी का छिड़काव व मैकेनिकल स्वीपिंग बढ़ा दी है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक प्रदूषण के मूल कारणों पर सख्ती नहीं होगी, राहत मिलना मुश्किल है।
पटना पिछले कई सालों से सर्दियों में प्रदूषण की मार झेल रहा है। इस बार ठंड जल्दी आने से नवंबर में ही हालात बिगड़ गए। CPCB ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत और सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल शहर के कई इलाकों में हवा सांस लेने लायक भी नहीं बची। लोग घरों में कैद होकर रहने को मजबूर हैं। प्रदूषण कम करने के लिए सरकार, प्रशासन और जनता को मिलकर ठोस प्रयास करने होंगे।