नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बीच भारत में Telegram पर संभावित कार्रवाई की खबरों ने जोर पकड़ लिया है। सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं और संदिग्ध चैनलों की वजह से सरकार Telegram पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है। इसी बीच Telegram के संस्थापक पावेल ड्यूरोव का बयान सामने आया है।
ड्यूरोव ने कहा कि Telegram हमेशा से अवैध गतिविधियों और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई करता रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध या गैरकानूनी सामग्री मिलने पर संबंधित चैनलों और अकाउंट्स के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।
NEET-UG परीक्षा को लेकर हाल के दिनों में कुछ Telegram चैनलों पर कथित पेपर लीक से जुड़े दावे वायरल हुए थे। इसके बाद परीक्षा की पारदर्शिता और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका को लेकर बहस शुरू हो गई। जांच एजेंसियां और संबंधित संस्थाएं ऐसे दावों की पड़ताल कर रही हैं।
Telegram प्रमुख ने यह भी कहा कि प्लेटफॉर्म की नीतियां उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और कानूनों के पालन को प्राथमिकता देती हैं। यदि किसी देश की एजेंसियां वैध कानूनी प्रक्रिया के तहत जानकारी साझा करती हैं, तो कंपनी नियमों के अनुरूप सहयोग करने पर विचार करती है।
इस बीच शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी परीक्षा में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी निगरानी के साथ-साथ मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था भी जरूरी है। केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म को जिम्मेदार ठहराने के बजाय पूरे नेटवर्क की जांच की जानी चाहिए।
सरकार की ओर से फिलहाल Telegram पर पूर्ण प्रतिबंध को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि परीक्षा सुरक्षा से जुड़े मामलों में विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
NEET-UG विवाद के बीच Telegram को लेकर उठे सवालों ने एक बार फिर यह चर्चा छेड़ दी है कि बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म किस तरह गलत सूचना, फर्जी दावों और अवैध गतिविधियों से निपटते हैं। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर बनी हुई है।