नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता सत्येंद्र जैन की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब खबर है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस चलाने की अनुमति दे दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सत्येंद्र जैन के खिलाफ बीएनएस की धारा 218 के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी थी, और गृह मंत्रालय का कहना है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में उनके खिलाफ अभियोजन चलाने के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इस मामले में कोर्ट में केस चलाया जाएगा।
मई 2022 में हुई थी गिरफ्तारी
गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हवाला कारोबार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में मई, 2022 में सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार किया था। उस समय वे स्वास्थ्य, बिजली और अन्य मंत्रालयों के जिम्मेदार थे, लेकिन गिरफ्तारी के बाद उन्होंने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। अक्टूबर, 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें 18 महीने की हिरासत के बाद जमानत दी, लेकिन ईडी ने उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया है और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
ईडी की जांच और आरोप
जांच के दौरान ईडी ने पाया कि 2015-16 में सत्येंद्र जैन ने चार कंपनियों के माध्यम से 4.81 करोड़ रुपये की अवैध धनराशि प्राप्त की। यह पैसा हवाला के जरिए कोलकाता स्थित एंट्री ऑपरेटरों को नकद में ट्रांसफर किया गया। ईडी का आरोप है कि इस धनराशि का इस्तेमाल दिल्ली और आसपास की कृषि भूमि की खरीद या ऋण के पुनर्भुगतान में किया गया था। ईडी के अनुसार, यह सभी ट्रांजैक्शन अवैध थे और सत्येंद्र जैन की संलिप्तता स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
सीबीआई जांच और आरोप
यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला 2017 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से शुरू हुआ था, जिसमें सत्येंद्र जैन पर आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप था। दिसंबर 2018 में सीबीआई ने उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया, जिसमें कहा गया कि उनकी आय से अधिक संपत्ति 1.47 करोड़ रुपये की थी, जो उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से लगभग 217 फीसदी ज्यादा थी। अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद सत्येंद्र जैन के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया तेज हो गई है।