गुजरात के गिर सोमनाथ में सोमवार को आयोजित ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ऐतिहासिक कुंभाभिषेक समारोह में भाग लिया। यह आयोजन पुनर्निर्मित Somnath Temple के उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।
समारोह में गुजरात के मुख्यमंत्री Bhupendra Patel, उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी, मंदिर ट्रस्ट के सदस्य, संत-महात्मा और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का उद्घाटन वर्ष 1951 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति Rajendra Prasad ने किया था। यह पुनर्निर्माण सरदार Vallabhbhai Patel के नेतृत्व में हुआ था।
पीएम मोदी ने किया रोड शो, श्रद्धालुओं ने किया स्वागत
सोमनाथ पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने शहर में रोड शो किया। रास्ते भर बड़ी संख्या में लोग उनके स्वागत के लिए मौजूद रहे। मंदिर परिसर की ओर बढ़ते समय देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
मंदिर पहुंचकर प्रधानमंत्री ने जलाभिषेक, महापूजा और ध्वज पूजा सहित कई धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। कुंभाभिषेक के लिए देश के 11 प्रमुख तीर्थ स्थलों से पवित्र जल लाया गया था।
1860 किलो के विशेष पात्र से हुआ अनुष्ठान
आयोजकों के अनुसार, कुंभाभिषेक के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए 1860 किलोग्राम वजनी अनुष्ठानिक पात्र को 90 मीटर लंबी क्रेन की मदद से मंदिर के शिखर तक पहुंचाया गया। आयोजकों ने इसे मंदिर के शीर्ष पर आयोजित पहला ऐसा भव्य समारोह बताया।
मंदिर में प्रवेश से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने परिसर में स्थापित सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। समारोह के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और भजनों की गूंज के बीच हेलीकॉप्टर से मंदिर परिसर पर फूलों की वर्षा भी की गई।
कड़ी सुरक्षा के बीच जुटे हजारों श्रद्धालु
हिंदू धर्म के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल सोमनाथ मंदिर को इस अवसर पर विशेष रूप से सजाया गया था। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हजारों श्रद्धालु गिर सोमनाथ पहुंचे।
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को देखते हुए जिलेभर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम के दौरान 2,000 से अधिक पुलिसकर्मी, होमगार्ड और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई थी।
‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ को मंदिर की पुनः प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने के प्रतीकात्मक आयोजन के रूप में देखा जा रहा है, जो भारतीय आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अहम केंद्र माना जाता है।