पटना: मतदाता सूची में विशेष गहन पुनर्रीक्षण को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव जहां चुनाव बहिष्कार की बात कर रहे हैं, वहीं मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव ने तेजस्वी को विधानसभा से इस्तीफा देने की सलाह दे दी है।
क्या कहा पप्पू यादव ने?
पप्पू यादव ने तेजस्वी यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“तेजस्वी नेता विपक्ष हैं, उन्हें अपनी बात कहने का पूरा अधिकार है। लेकिन हमारा भरोसा संसद और सर्वोच्च न्यायालय में है। अगर विधानसभा में हमारी आवाज दबाई जाती है, तो सुप्रीम कोर्ट में उसे दबाया नहीं जा सकता।”
उन्होंने आगे कहा कि तेजस्वी यादव ने जो चुनाव बहिष्कार की बात कही है, वह अंतिम विकल्प हो सकता है, लेकिन उससे पहले सभी विपक्षी विधायकों और सांसदों को इस्तीफा देकर सत्ता पक्ष को अकेले सदन चलाने देना चाहिए।
पप्पू यादव को अब भी क्या उम्मीद है?
पप्पू यादव ने कहा कि देश में कोई भी संस्था संविधान से ऊपर नहीं है — न चुनाव आयोग और न कोई और। अगर चुनाव आयोग निरंकुश हो जाए, तो संसद और सुप्रीम कोर्ट के पास उसे चुनौती देने का अधिकार है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा,
“चुनाव आयोग को अब जाकर कैसे पता चला कि एक लाख वोटर फर्जी हैं? 16 सालों से कुछ नहीं दिखा? अब जब बीजेपी को हार का डर सताने लगा तो ये लोग कुछ भी कर रहे हैं।”
बीजेपी पर सीधा आरोप
पप्पू यादव ने चुनाव आयोग पर बीजेपी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए कहा,
“आधार कार्ड को ही सब कुछ मान लिया गया था। लेकिन अब जब चुनाव सामने है, तो आयोग नया हथकंडा अपनाकर मतदाता सूची में गड़बड़ी कर रहा है। जिन इलाकों में बीजेपी कमजोर है, वहां बिना जांच के फॉर्म-6 के जरिए नाम हटाए जा रहे हैं।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एलओपी और बीएलओ ज़मीनी स्तर पर गए बिना ही नाम काटने का काम कर रहे हैं और चुनाव आयोग का बयान बीजेपी की भाषा जैसा लग रहा है।
निष्कर्ष:
मतदाता पुनर्रीक्षण के नाम पर उठे इस राजनीतिक विवाद ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। तेजस्वी यादव के बहिष्कार के संकेत के बाद अब पप्पू यादव की तीखी टिप्पणी ने विपक्ष के भीतर ही बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है।