पटना: मर्डर, कमीशनखोरी, रंगदारी, गाली-गलौज और महिलाओं से दुर्व्यवहार जैसे गंभीर आरोपों में घिरे पटना के मेयरपुत्र और बीजेपी नेता शिशिर कुमार के राजनीतिक कद को अब खुद उनकी पार्टी ही नकारने लगी है। पार्टी के बड़े नेताओं ने उनके द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया, जिसके चलते आयोजन रद्द करना पड़ा।
भामा शाह जयंती का आयोजन बना विवाद की जड़
शिशिर कुमार ने 28 अप्रैल को पटना के बापू सभागार में भामा शाह जयंती मनाने का ऐलान किया था। इसके लिए वे महीनों से बिहार के विभिन्न जिलों में दौरा कर लोगों को न्योता दे रहे थे और दावा कर रहे थे कि यह कार्यक्रम पार्टी में उनकी ताकत को स्थापित कर देगा। लेकिन आखिरी वक्त में बीजेपी नेताओं ने इसमें शामिल होने से साफ इनकार कर दिया।
पार्टी के रुख से टूटी उम्मीदें, कार्यक्रम रद्द
बीजेपी नेताओं के इस रवैये से कार्यक्रम की सारी साख खत्म हो गई। शिशिर कुमार, जो आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट के प्रबल दावेदार बनने की कोशिश में लगे थे, अब पार्टी से कटते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर उन्होंने आयोजन रद्द करने का बहाना यह बताया कि कई संगठनों ने मिलकर एक साझा कार्यक्रम करने का निर्णय लिया है।
विवादों से भरा अतीत, पार्टी की छवि पर असर
शिशिर कुमार के खिलाफ मर्डर, सरकारी पद के दुरुपयोग, घूसखोरी और महिला अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार जैसे कई गंभीर आरोप हैं। नगर आयुक्त द्वारा राज्य सरकार को लिखे पत्र में खुलकर कमीशनखोरी और धमकियों का जिक्र किया गया है।
डिप्टी सीएम के सामने की गाली-गलौज
एक कार्यक्रम के दौरान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव और अन्य मंत्रियों की मौजूदगी में उन्होंने नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी को गालियां दीं। वहीं एक महिला जनसंपर्क अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार और आपत्तिजनक आरोप लगाने के मामले में FIR भी दर्ज कराई गई है।
पार्टी के भीतर भी संरक्षण पर सवाल
बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार शिशिर कुमार को अब तक पार्टी के एक प्रभावशाली नेता का संरक्षण प्राप्त था, जिनका एक मंत्री से निजी विवाद है। लेकिन अब शिशिर कुमार की बढ़ती बदनामी से वह नेता भी किनारा करने लगे हैं।