बिहार में अपराधियों के लिए आने वाला समय और मुश्किल होने वाला है। राज्य के डीजीपी विनय कुमार ने स्पष्ट किया है कि सात साल या उससे अधिक सजा वाले सभी मामलों में अब घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम की मौजूदगी अनिवार्य होगी। अपराध जांच को आधुनिक बनाने के लिए अगले एक-दो वर्षों में चार स्थायी और नौ क्षेत्रीय फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) यानी कुल 13 लैब पूरी तरह चालू कर दी जाएंगी।
पटना के सरदार पटेल भवन में आयोजित दो दिवसीय फॉरेंसिक बायोलॉजिकल साइंस सैटेलाइट कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन के दौरान डीजीपी ने बताया कि राज्य के 28 ऐसे जिलों में, जहां क्षेत्रीय फॉरेंसिक लैब नहीं हैं, वहां जिला चलंत प्रयोगशालाओं के लिए भवन तैयार कर लिए गए हैं। साथ ही, इन जिलों को फॉरेंसिक वैन भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे घटनास्थल पर तुरंत जांच संभव हो सके।
उन्होंने जानकारी दी कि बिहार के 44 पुलिस जिलों को 50 मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई जा चुकी हैं और भविष्य में इनकी संख्या और बढ़ाई जाएगी। क्षेत्रीय लैब के लिए नियुक्तियां पूरी हो चुकी हैं, जरूरी उपकरण खरीदे जा चुके हैं और भवन निर्माण भी पूरा हो गया है। जल्द ही ये सभी लैब पूरी तरह काम करने लगेंगी।
डीएनए जांच और साइबर अपराध पर विशेष फोकस
डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि डीएनए जांच के बढ़ते मामलों को देखते हुए तीन से चार नई लैब स्थापित करने के लिए केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस लैब (सीएफएसएल) से सहयोग मांगा गया है। इसके अलावा, पटना और राजगीर में साइबर फॉरेंसिक लैब भी स्थापित की जाएगी, जिससे साइबर अपराधों की जांच और तेज व प्रभावी हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों के इस्तेमाल से अब अपराधियों के बच निकलना आसान नहीं होगा। पुलिस हर मामले में वैज्ञानिक तरीके से जांच कर दोषियों तक पहुंचने का काम करेगी।
कानून व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
बिहार पुलिस का यह कदम राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। फॉरेंसिक लैब की संख्या बढ़ने, मोबाइल वैन की उपलब्धता और साइबर लैब की स्थापना से अपराध जांच की प्रक्रिया और अधिक सटीक व तेज होगी।
डीजीपी ने दो टूक कहा कि अब बिहार में अपराधियों के लिए कोई रास्ता आसान नहीं बचेगा। आधुनिक तकनीक और सख्त कार्रवाई के जरिए अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।