बिहार में बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। मंगलवार को जारी निर्देश में उन्होंने साफ कर दिया कि अब बिजली सेवाओं में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि उपभोक्ताओं को समय पर सेवा नहीं मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों पर प्रतिदिन 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
सरकार के इस फैसले का उद्देश्य बिजली सेवाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और उपभोक्ता-केंद्रित बनाना है। लंबे समय से बिजली कनेक्शन में देरी और लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया।
कनेक्शन देने की तय हुई समय-सीमा
नए आदेश के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में बिजली कनेक्शन अधिकतम 3 दिनों के भीतर देना अनिवार्य होगा। अन्य शहरी इलाकों में 7 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 15 दिन की समय सीमा तय की गई है। यदि तय अवधि में कनेक्शन नहीं दिया गया, तो संबंधित अधिकारी को हर दिन 1000 रुपये का जुर्माना देना होगा। इससे विभागीय सुस्ती पर लगाम लगाने और कामकाज में तेजी आने की उम्मीद है।
बिलिंग व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव
राज्य में स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं के लिए ‘टाइम ऑफ डे’ (ToD) टैरिफ लागू किया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत दिन के अलग-अलग समय में बिजली दरें अलग-अलग होंगी, जिससे उपभोक्ता अपने उपयोग के अनुसार खर्च नियंत्रित कर सकेंगे।
नई व्यवस्था के मुताबिक, सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली सस्ती रहेगी और इस दौरान करीब 20 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। वहीं शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक पीक आवर में बिजली दरें लगभग 10 प्रतिशत अधिक होंगी। रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक सामान्य दरें लागू रहेंगी।
उपभोक्ताओं को राहत, व्यवस्था होगी मजबूत
ऊर्जा विभाग के अनुसार, इस बदलाव का मकसद बिजली खपत को संतुलित करना और पीक समय में लोड कम करना है। इससे जहां बिजली व्यवस्था पर दबाव घटेगा, वहीं उपभोक्ताओं को भी बचत का मौका मिलेगा।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री का यह फैसला राज्य के लाखों उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। सख्त नियमों और नई तकनीकी व्यवस्था के जरिए सरकार ने साफ संकेत दिया है कि अब सेवा में देरी और लापरवाही के लिए कोई जगह नहीं है।