नई दिल्ली : अगर आप शिक्षक बनने का सपना देख रहे हैं, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि B.Ed, BTC (अब D.El.Ed) और अन्य टीचर ट्रेनिंग कोर्स किस स्तर की नौकरी के लिए होते हैं। कई अभ्यर्थी गलत जानकारी के कारण ऐसा कोर्स चुन लेते हैं, जो उनकी पसंदीदा भर्ती के लिए मान्य नहीं होता। ऐसे में सही कोर्स का चुनाव आपके करियर के लिए बेहद अहम है।
B.Ed किसके लिए है?
बैचलर ऑफ एजुकेशन (B.Ed) दो वर्षीय प्रोफेशनल कोर्स है। इसे ग्रेजुएशन के बाद किया जाता है। B.Ed करने वाले उम्मीदवार आमतौर पर मिडिल, सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षक बनने के पात्र होते हैं। हालांकि भर्ती के लिए संबंधित राज्य या केंद्र की पात्रता परीक्षाएं जैसे CTET या TET पास करना भी जरूरी हो सकता है।
BTC या D.El.Ed क्या है?
पहले जिसे BTC (Basic Training Certificate) कहा जाता था, अब उसे D.El.Ed (Diploma in Elementary Education) के नाम से जाना जाता है। यह दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स है, जो मुख्य रूप से प्राथमिक (कक्षा 1 से 5) और कई राज्यों में उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8) स्तर के शिक्षकों की भर्ती के लिए मान्य होता है।
दोनों में क्या है सबसे बड़ा अंतर?
सबसे बड़ा अंतर पढ़ाने के स्तर का है। D.El.Ed प्राथमिक शिक्षा पर केंद्रित होता है, जबकि B.Ed माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के शिक्षण के लिए तैयार करता है। इसलिए किसी भी कोर्स में प्रवेश लेने से पहले यह तय करना जरूरी है कि आप किस स्तर पर शिक्षक बनना चाहते हैं।
भर्ती में किस कोर्स को मिलती है प्राथमिकता?
यह संबंधित भर्ती के नियमों पर निर्भर करता है। प्राथमिक शिक्षक भर्ती में आमतौर पर D.El.Ed को प्राथमिक योग्यता माना जाता है, जबकि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में B.Ed की आवश्यकता होती है। कई भर्तियों में शैक्षणिक योग्यता के साथ TET/CTET या अन्य पात्रता परीक्षा भी अनिवार्य होती है।
कोर्स चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान
कोई भी टीचर ट्रेनिंग कोर्स चुनने से पहले संबंधित राज्य की भर्ती नियमावली, पात्रता और भविष्य के अवसरों की जानकारी जरूर लें। इससे बाद में किसी तरह की परेशानी से बचा जा सकता है और सही दिशा में तैयारी की जा सकती है।
अगर आपका लक्ष्य प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक बनना है, तो D.El.Ed बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, माध्यमिक या उच्च माध्यमिक स्तर पर पढ़ाना चाहते हैं तो B.Ed करना जरूरी है। सही जानकारी और सही कोर्स का चुनाव ही शिक्षक बनने की राह आसान बना सकता है।