प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा और मां स्कन्दमाता की महिमा का किया गुणगान

Prime Minister Narendra Modi and Chief Minister Yogi Adityanath praised the glory of Mother Kushmanda and Mother Skandmata on the fourth day of Navratri

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवरात्रि के चौथे दिन देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और इस अवसर पर ‘अम्बा स्तवम्’ सुनने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि नवरात्रि के दौरान मां अम्बे की उपासना सभी भक्तों को भावविभोर कर देती है और देवी मां के स्वरूपों को समर्पित यह स्तुति अलौकिक अनुभूति देने वाली है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस संबंध में ‘अम्बा स्तवम्’ सुनने की सलाह दी, जिसे 9 बालिकाएं मां की स्तुति करते हुए प्रस्तुत कर रही हैं। इस स्तुति को ब्रह्माश्री सदाशिवन ने लिखा है और कुलदीप एम. पई ने इसे संगीतबद्ध किया है। प्रधानमंत्री ने इस स्तुति का लिंक अपने फॉलोअर्स के साथ साझा किया।

वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी नवरात्रि के इस विशेष दिन पर मां कूष्मांडा और मां स्कन्दमाता की महिमा का गुणगान किया। मुख्यमंत्री योगी ने अपनी पोस्ट में मां कूष्मांडा से प्रदेशवासियों के लिए सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। उन्होंने लिखा, “सिद्धियों और निधियों की प्रदात्री, शक्ति स्वरूपा मां भगवती के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा से प्रार्थना है कि सभी भक्तों और प्रदेशवासियों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें।”

इसके बाद सीएम योगी ने मां स्कन्दमाता की महिमा का भी उल्लेख किया और लिखा, “नमामि स्कन्दमातरं स्कन्धधारिणीम्। आदिशक्ति मां दुर्गा के पंचम स्वरूप स्कन्दमाता की पूजा से उन्नति और प्रगति के मार्ग प्रशस्त होते हैं। जगजननी से प्रार्थना है कि आपका आशीर्वाद सारा संसार पर बना रहे, सभी का कल्याण हो। जय मां स्कन्दमाता!”

मां कूष्मांडा और मां स्कन्दमाता का महत्व
माता कूष्मांडा को ब्रह्मांड की रचयिता के रूप में पूजा जाता है, जो जीवन देने वाली मुस्कान का प्रतीक हैं। उनका नाम ‘कूष्मांडा’ का अर्थ है छोटा और अंडाकार ऊर्जा पिंड, जो हमारे हृदयस्थ स्थिति का प्रतीक है। उन्हें समृद्धि, स्वास्थ्य और साहस की देवी माना जाता है, और उनकी पूजा करने से भक्तों को सभी प्रकार की समस्याओं और रोगों से मुक्ति मिलती है।

दूसरी ओर, नवरात्रि की पंचमी तिथि को पूजा जाने वाली मां स्कन्दमाता को भगवान कार्तिकेय (स्कन्द) की माता के रूप में पूजा जाता है। मां स्कन्दमाता को ममता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जो अपने भक्तों को आशीर्वाद और सुरक्षा प्रदान करती हैं। स्कन्दमाता चार भुजाओं वाली होती हैं, जिनमें से दो भुजाओं में वे कमल के फूल पकड़ती हैं, एक भुजा से भक्तों को आशीर्वाद देती हैं, और चौथी भुजा में वे अपने पुत्र स्कन्द (कार्तिकेय) को गोद में लिए रहती हैं। उनका यह रूप शांति और सौम्यता का प्रतीक है।

मां स्कन्दमाता का वाहन शेर है, जो शक्ति और ममता का अद्भुत संगम दिखाता है। उन्हें ‘पद्मासना’ भी कहा जाता है क्योंकि वे कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं।

नवरात्रि के इस पावन अवसर पर, मां कूष्मांडा और मां स्कन्दमाता के आशीर्वाद से पूरे देश में सुख, समृद्धि और उन्नति का मार्ग प्रशस्त हो।

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