नई दिल्ली : कई लोगों को नाखून चबाने की आदत होती है। यह व्यवहार अक्सर बचपन से शुरू होता है और कई बार बड़े होने के बाद भी बना रहता है। मनोविज्ञान के अनुसार, यह केवल एक सामान्य आदत नहीं, बल्कि कई बार व्यक्ति की भावनात्मक या मानसिक स्थिति का संकेत भी हो सकता है।
तनाव और चिंता से जुड़ी हो सकती है यह आदत
विशेषज्ञों का मानना है कि नाखून चबाने की आदत अक्सर तनाव, चिंता, घबराहट या मानसिक दबाव के दौरान अधिक दिखाई देती है। जब व्यक्ति किसी चुनौतीपूर्ण या असहज स्थिति का सामना करता है, तो वह अनजाने में इस तरह का व्यवहार करने लगता है।
बोरियत या एकाग्रता के दौरान भी होता है ऐसा
सिर्फ तनाव ही नहीं, कई लोग बोरियत महसूस होने पर या किसी काम में पूरी तरह ध्यान लगाए रहने के दौरान भी नाखून चबाने लगते हैं। यह व्यवहार कई बार बिना सोचे-समझे अपने आप होने लगता है और व्यक्ति को इसका एहसास भी नहीं होता।
भावनाओं को नियंत्रित करने का तरीका भी हो सकता है
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, कुछ लोगों के लिए नाखून चबाना अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने या बेचैनी कम करने का एक तरीका बन जाता है। हालांकि इससे कुछ समय के लिए राहत महसूस हो सकती है, लेकिन यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
सेहत पर भी पड़ सकता है असर
बार-बार नाखून चबाने से नाखून और उनके आसपास की त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा हाथों पर मौजूद बैक्टीरिया और गंदगी मुंह के जरिए शरीर में पहुंच सकती है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।
आदत छोड़ने के लिए क्या करें?
यदि यह आदत लगातार बनी हुई है, तो सबसे पहले यह समझने की कोशिश करें कि किन परिस्थितियों में आप नाखून चबाते हैं। तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन, गहरी सांस लेने जैसी तकनीकों का सहारा लिया जा सकता है। नाखूनों को नियमित रूप से ट्रिम रखना और हाथों को व्यस्त रखने की कोशिश भी इस आदत को कम करने में मददगार हो सकती है।
कब लेनी चाहिए विशेषज्ञ की सलाह?
अगर नाखून चबाने की आदत इतनी बढ़ जाए कि इससे नाखूनों, त्वचा या रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ने लगे, तो किसी मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित हो सकता है। समय रहते उचित मार्गदर्शन मिलने से इस आदत पर काबू पाया जा सकता है।