CBSE 12वीं रिजल्ट पर छात्रों का हंगामा, शिक्षा मंत्रालय ने दी सफाई

Students Protest Over CBSE Class 12 Results; Education Ministry Issues Clarification
  • रिपोर्ट: स्निग्धा श्रीवास्तव

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 12वीं कक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद छात्रों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कई छात्र-छात्राओं ने आरोप लगाया है कि कॉपियों की जांच में इस्तेमाल किए गए ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM)’ सिस्टम के कारण उन्हें उम्मीद से कम अंक मिले हैं। 90 से 95 प्रतिशत अंक की उम्मीद रखने वाले कई छात्रों के कम नंबर आने के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

छात्रों की शिकायतों और विवाद को लेकर स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता सचिव संजय कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग कोई नया प्रयोग नहीं है। सीबीएसई ने पहली बार इस प्रणाली को वर्ष 2014 में लागू किया था, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे बाद में रोक दिया गया था। इस वर्ष बेहतर तकनीकी तैयारी के साथ इसे दोबारा लागू किया गया है, ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाया जा सके।

शिक्षा सचिव ने बताया कि इस बार 12वीं की लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर उनकी पीडीएफ तैयार की गई थी। स्कैनिंग प्रक्रिया में तीन स्तर की सुरक्षा व्यवस्था अपनाई गई, जिससे अंकों की गणना में त्रुटि की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। हालांकि जांच के दौरान करीब 13 हजार कॉपियां ऐसी मिलीं, जिनमें छात्रों ने हल्के रंग की स्याही का इस्तेमाल किया था। स्कैनिंग में ये उत्तर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दिए। ऐसे मामलों में छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए इन कॉपियों की मैन्युअल जांच कराने का निर्णय लिया गया है।

छात्रों को राहत देते हुए शिक्षा मंत्रालय ने री-चेकिंग और पुनर्मूल्यांकन की फीस में भी भारी कटौती की घोषणा की है। पहले आंसर शीट की कॉपी प्राप्त करने के लिए 700 रुपये शुल्क देना पड़ता था, जिसे अब घटाकर 100 रुपये कर दिया गया है। वहीं, वैलिडेशन फीस भी 500 रुपये से घटाकर 100 रुपये कर दी गई है। किसी विशेष प्रश्न की दोबारा जांच के लिए अब केवल 25 रुपये शुल्क लिया जाएगा।

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि री-चेकिंग के दौरान किसी छात्र के अंक बढ़ते हैं, तो उससे ली गई पूरी फीस वापस कर दी जाएगी। शिक्षा सचिव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य छात्रों से पैसा कमाना नहीं, बल्कि उन्हें उनके प्रदर्शन के अनुसार सही अंक दिलाना है।

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