NEET छात्रा की संदिग्ध मौत: CBI जांच पर उठे सवाल, हॉस्टल संचालक की जमानत पर फैसला 11 मार्च तक टला

Suspicious death of NEET student: CBI probe questioned, hostel operator's bail decision deferred till March 11

पटना। राजधानी पटना में NEET की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में अदालत में सुनवाई तेज हो गई है। सुनवाई के बाद पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता एस.के. पांडेय ने मीडिया से बातचीत में CBI की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए और इसे “शर्मनाक और दुखद” बताया।

अधिवक्ता ने कहा कि मामले में जिन पुलिस अधिकारियों और जांच अधिकारियों की भूमिका रही है, उनके खिलाफ साक्ष्यों के साथ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि CBI को पॉक्सो एक्ट की धाराएं हटाने का अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, बिना ठोस आधार के पॉक्सो एक्ट की धाराएं हटाना कानून के विरुद्ध है और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ऐसा किसके लाभ के लिए किया गया।

जमानत याचिका पर सुनवाई स्थगित
शंभू गर्ल्स हॉस्टल के संचालक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर सोमवार को बहस हुई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी है। फिलहाल जमानत पर कोई फैसला नहीं हुआ है।

पीड़ित पक्ष के वकील ने कहा कि यह मामला देश की लाखों बेटियों की नजर में है और सब यह जानना चाहती हैं कि उन्हें न्याय मिलेगा या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि CBI की कार्यप्रणाली निष्पक्ष नहीं दिख रही।

पॉक्सो एक्ट हटाने पर विवाद
अधिवक्ता ने अदालत में यह सवाल उठाया कि जब छात्रा की उम्र 18 वर्ष से कम थी और स्कूल प्रमाणपत्र में भी यही दर्ज है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई है तथा एफएसएल रिपोर्ट में मानव वीर्य मिलने की बात कही गई है, तो फिर पॉक्सो एक्ट की धाराएं क्यों हटाई गईं?

उन्होंने कहा कि जब राज्य सरकार ने मामला CBI को सौंपा था, तब दर्ज एफआईआर में पॉक्सो एक्ट शामिल था। बाद में CBI ने अलग प्राथमिकी दर्ज कर उसमें पॉक्सो की धाराएं नहीं जोड़ीं। इसे लेकर अदालत में CBI अधिकारियों से जवाब मांगा गया, लेकिन वे स्पष्ट कारण नहीं बता सके।

सरकार से भी जवाब की मांग
पीड़ित पक्ष ने राज्य सरकार से भी सवाल किया कि जांच एजेंसियां सरकार के अधीन कार्य करती हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि जांच स्वतंत्र और पारदर्शी नहीं होगी, तो न्याय मिलना कठिन हो जाएगा।

क्या है पूरा मामला?
जहानाबाद की छात्रा पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी। 5 जनवरी को वह हॉस्टल में बेहोशी की हालत में मिली। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

9 जनवरी 2026 को पटना के चित्रगुप्त नगर थाना में छात्रा के पिता के बयान पर मामला दर्ज किया गया। परिजनों ने हॉस्टल संचालक और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए तथा हत्या और दुष्कर्म की आशंका जताई।

मृतका के पिता ने शरीर पर चोट के निशान होने और शारीरिक शोषण की आशंका जाहिर की थी। पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट में भी गंभीर तथ्यों का उल्लेख किया गया। मामले को लेकर पटना में विरोध-प्रदर्शन हुए, जिसके बाद 31 जनवरी को राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंपने की अनुशंसा की।

इसके बाद CBI ने अपनी प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की, जो फिलहाल जारी है। अदालत में अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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