सुप्रीम कोर्ट के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को खारिज करने के बाद खुशी व राहत की सांस लेते हुए नाबालिग पीड़िता की मां ने कहा कि इस आदेश से न्याय में उनका भरोसा बहाल हुआ है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पिछले साल मार्च में दिए गए फैसले में कहा था कि नाबालिग पीड़िता के वक्ष पकड़ने व सलवार का नाड़ा खोलने को बलात्कार का “प्रयास” नहीं माना जा सकता और यह सिर्फ बलात्कार की “तैयारी” थी। बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए नागरिक समाज संगठनों के नेटवर्क जस्ट राइट्स…
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