बकरीद पर मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी की अपील, कानून और भाईचारे के साथ मनाएं त्योहार

Maulana Javed Haider Zaidi's Appeal on Eid al-Adha: Celebrate the Festival with Adherence to the Law and Brotherhood.

नई दिल्ली: ईद-उल-अजहा (बकरीद) को लेकर मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने मुस्लिम समाज से शांति, सौहार्द और कानून का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कुर्बानी केवल उन्हीं जानवरों की दी जाए, जिनकी अनुमति भारतीय संविधान और देश के कानून में प्राप्त है। मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने कहा कि इस्लाम अमन, इंसानियत और भाईचारे का धर्म है, इसलिए किसी भी ऐसे कार्य से बचना चाहिए जिससे किसी धर्म या समुदाय की भावनाएं आहत हों। उन्होंने कहा कि भारत गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी सौहार्द का देश है,…

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त्योहार पर घर लौटना हुआ आसान: बस किराये में बड़ी छूट, टिकट बुकिंग शुरू

Returning home during the festival has become easier: Big discount on bus fares, ticket booking starts

देश में त्योहारों का मौसम नजदीक है। ऐसे में बिहार से बाहर रहने वाले लोग अपने घर लौटने को लेकर उत्साहित हैं, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी ट्रेन में टिकट को लेकर होती है। वेटिंग लिस्ट की लंबी कतार के कारण यात्रियों के पास सड़क मार्ग से सफर करने का ही विकल्प बचता है। हालांकि, पहले यह सफर महंगा पड़ता था, लेकिन अब राज्य सरकार ने इसे किफायती बना दिया है। अब सस्ती बस यात्रा से लौट सकेंगे घर छठ, दिवाली और दुर्गा पूजा जैसे बड़े त्योहारों के मद्देनजर बिहार सरकार…

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रामनौमी के पावन पर्व के अवसर पे भंगहा माई स्थान की बेहतर तैयारी

चनपटिया बेतिया। बलथर रोड में स्थित भंगहा मां भगवती का भव्य मंदिर है।जहा हर वर्ष के भाती रामनौमि के पावन अवसर पर मां के दर्शन पूजन के लिए दूर दूर से लाखो के संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है।तरह तरह के खेल तमसा एवम प्रसाद आदि का दुकान आज ही सज कर तैयार है। यहां आठ रोज पहले से ही मां के उपासक उपस्थित होकर नौरात्रि का उपासना में लगे हुए है।लोगो को कहना है।की जो भी मां के दरबार में आता है।सबका मनोकना मां पूण कर देती है।इस पावन अवसर…

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बिहार वासियों का विशेष त्योहार, छठ पर्व में है सूर्य देवता के पूजा का विधान

वीरेंद्र कुमार सिंह सीतामढ़ी । एक ऐसा पूजा जिसमें कोई पंडित पुजारी नहीं होता जिस पूजा में देवता प्रत्यक्ष रूप से दिखाई पड़ता हैं इस पूजा में डूबते सूरज व उगते सूरज को प्रत्यक्ष पूजते हैं जिसमें व्रत करने वाले समुदाय से पड़े हैं जिसमें मात्र लोक गीत गाए जाते हैं इस पूजा में पकवान घर से बनाए जाते हैं इस पर्व में घाट पर ऊंच-नीच का भेदभाव नहीं रखते हैं । इस पूजा में अमीर गरीब बड़े छोटे श्रद्धा से प्रसाद ग्रहण करते हैं।ऐसा इस पर्व का मान्यता माना…

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