सिंधु जल संधि पर भारत-पाक में बढ़ा तनाव, संयुक्त राष्ट्र में भारत का सख्त रुख

Tensions Escalate Between India and Pakistan Over Indus Waters Treaty; India Adopts Firm Stance at the UN

नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जल विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने के बाद पाकिस्तान लगातार इसकी बहाली की मांग कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठा रहा है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भी पाकिस्तान ने इस संधि का जिक्र किया, जबकि कार्यक्रम का मुख्य विषय सभी के लिए सुरक्षित जल और स्वच्छता सुनिश्चित करना था।

इस पर भारत ने कड़ा जवाब देते हुए स्पष्ट रुख अपनाया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि संधियों की पवित्रता की बात करने से पहले पाकिस्तान को मानव जीवन की पवित्रता का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान पर आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब तक वह आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक संधि निलंबित रहेगी।

हरीश ने यह भी कहा कि भारत हमेशा एक जिम्मेदार ऊपरी तटीय देश रहा है, लेकिन जिम्मेदारी दोनों पक्षों को निभानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने भारत पर कई बार युद्ध थोपे और हजारों आतंकवादी हमलों को बढ़ावा दिया, जिससे निर्दोष नागरिकों की जान गई।

भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि पर मूल रूप से सहयोग और सद्भावना की भावना से हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन बदलती परिस्थितियों के कारण इसमें संशोधन की आवश्यकता है। पिछले 65 वर्षों में तकनीक, जनसंख्या और पर्यावरण में हुए बदलावों को देखते हुए भारत ने बातचीत का प्रस्ताव रखा, लेकिन पाकिस्तान ने इस पर सहमति नहीं जताई।

गौरतलब है कि 1960 में हुई इस संधि को भारत ने पिछले वर्ष पहलगाम हमले के बाद निलंबित कर दिया था। इस हमले की जिम्मेदारी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी, जिसे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा माना जाता है। इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया।

संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम में भारत ने यह भी रेखांकित किया कि वह सुरक्षित जल और स्वच्छता से जुड़े सतत विकास लक्ष्यों को प्राथमिकता देता है। सरकार का जल जीवन मिशन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके तहत अब तक लगभग 81.76 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों, यानी करीब 15.8 करोड़ घरों तक नल के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुंचाया जा चुका है।

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