बिहार के नियोजित शिक्षकों ने सक्षमता परीक्षा पास कर सरकारी कर्मी का दर्जा प्राप्त किया है, लेकिन उन्हें राज्यकर्मी के तौर पर वेतनमान का लाभ नहीं मिल रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि विशिष्ट शिक्षकों को सातवें वेतनमान का लाभ नहीं दिया जा सकता। हालांकि, सरकार ने यह भी कहा है कि इन शिक्षकों को आठवें वेतनमान का लाभ दिलाने के लिए वित्त विभाग से सिफारिश की जाएगी।
सातवें वेतनमान के लाभ पर सवाल
वामदल के विधायक अजय कुमार ने मंगलवार को विधानसभा में ध्यानाकर्षण के माध्यम से यह सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जब सरकार ने मान लिया है कि नियोजित शिक्षक परीक्षा पास कर सरकारी कर्मी हो गए, तो उन्हें सरकारी कर्मी की तरह वेतन क्यों नहीं दिया जा रहा? उन्होंने यह भी सवाल किया कि इनके लिए अलग पे मैट्रिक्स क्यों तय किया गया है? इस पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने जवाब दिया।
आठवें वेतन आयोग के तहत शिक्षकों के वेतनमान का निर्धारण
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने 1 सितंबर 2019 से नियोजित शिक्षकों को ईपीएफ योजना का लाभ दिया है, जिसमें राज्य सरकार 5% का अंशदान करती है। इसके साथ ही 1 अप्रैल 2021 से शिक्षकों का वेतन 15% बढ़ाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय निकाय के शिक्षकों के लिए बिहार विद्यालय विशिष्ट शिक्षक नियमावली और बिहार अध्यापक नियुक्ति नियामावली लाई गई हैं, जिसके तहत नए पद सृजित किए गए हैं।
शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि सातवें वेतन आयोग के तहत वर्ग 1 से 5 के शिक्षकों को 25,000 रुपये, वर्ग 6 से 8 के शिक्षकों को 28,000 रुपये, वर्ग 9 से 10 के शिक्षकों को 31,000 रुपये और वर्ग 11 से 12 के शिक्षकों को 32,000 रुपये प्रारंभिक वेतनमान के रूप में निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, आठवें वेतन आयोग में इन विद्यालय अध्यापकों और विशिष्ट शिक्षकों के वेतनमान का निर्धारण करने के लिए वित्त विभाग को सिफारिश की जाएगी।
मंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में केंद्र सरकार आठवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू करेगी और इसके बाद फिटमेंट कमेटी गठित की जाएगी। वे शिक्षकों के लिए वेतनमान में सुधार करने की अनुशंसा करेंगे ताकि इन्हें लाभ मिल सके।