नई दिल्ली— यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार इन नियमों पर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे कथित भ्रम का तथ्यों के साथ जवाब देने की तैयारी कर रही है।
UGC की ओर से लागू किए गए इन नए नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकना और कैंपस में समानता सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। ये नियम “हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस में इक्विटी रेगुलेशन” के तहत लाए गए हैं और इन्हें 13 जनवरी 2026 से लागू किया गया है।
हालांकि, रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इन नियमों को लेकर ऊंची जातियों के बीच नाराजगी देखी जा रही है। सरकार अब जल्द ही इस पूरे मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर सकती है। वहीं, बजट सत्र से पहले विपक्ष इस मुद्दे को और जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है।
इस बीच, विपक्ष को बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट और सत्ताधारी भाजपा के युवा विंग युवा मोर्चा के एक नेता—जिन्होंने हाल ही में पार्टी से इस्तीफा दिया है—का भी समर्थन मिला है। बरेली के जिला अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने इन नियमों को लेकर कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ये सुधार लाने के बजाय समाज में बंटवारा बढ़ा सकते हैं।
अलंकार अग्निहोत्री ने UGC के नए नियमों को “काला कानून” बताते हुए कहा, “ये नियम शैक्षणिक माहौल को खराब करेंगे और इन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।” उनका कहना है कि ऐसे प्रावधान शिक्षा के क्षेत्र में समानता स्थापित करने के बजाय सामाजिक विभाजन को और गहरा कर सकते हैं।
UGC के नए नियमों को लेकर जारी यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, खासकर तब जब संसद का बजट सत्र शुरू होने वाला है और विपक्ष इस मुद्दे को बड़े राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी में है।