गया में 21 दिसंबर को आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के संरक्षक जीतन राम मांझी ने बड़ा राजनीतिक बयान देकर हलचल मचा दी। उन्होंने साफ कहा कि यदि उनकी पार्टी को राज्यसभा की सीट नहीं मिली तो वे एनडीए से अलग हो जाएंगे। मांझी ने यह भी कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने राज्यसभा सीट देने का वादा किया था, लेकिन अब तक उसे पूरा नहीं किया गया। उन्होंने यहां तक कहा कि जरूरत पड़ी तो वे केंद्रीय मंत्री पद छोड़ने को भी तैयार हैं।
मांझी के इस बयान पर कांग्रेस ने जोरदार प्रतिक्रिया दी है। बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि जीतन राम मांझी कहीं नहीं जाने वाले हैं और यह सिर्फ दबाव बनाने की राजनीति है। उन्होंने दावा किया कि चाहे बीजेपी राज्यसभा की सीट दे या न दे, मांझी एनडीए नहीं छोड़ेंगे। राजेश राम ने तंज कसते हुए कहा कि ये सब “प्रेशर पॉलिटिक्स” है और पहले भी ऐसा हो चुका है।
दरअसल, गया में आयोजित हम पार्टी के कार्यक्रम के दौरान जीतन राम मांझी ने खुले मंच से अपने बेटे और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन को संबोधित करते हुए मगही भाषा में बीजेपी के खिलाफ संघर्ष के लिए तैयार रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि पार्टी ने बीजेपी की बेइमानी बहुत सहन कर ली है और अब आगे की लड़ाई के लिए तैयार रहना होगा।
मांझी ने मंच से कहा कि उनकी पार्टी को राज्यसभा की सीट चाहिए और आने वाले चुनाव को देखते हुए पार्टी को अलग राह पर चलने की भी तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा और विधानसभा—दोनों चुनावों में बीजेपी ने उनके साथ बेइमानी की है और पार्टी को कमतर आंका गया।
अपने बेटे को समझाते हुए मांझी ने कहा कि राजनीति में मन मजबूत रखना जरूरी है और जोखिम उठाने से डरना नहीं चाहिए। उन्होंने दावा किया कि हम पार्टी के पास पांच से छह प्रतिशत वोट बैंक है और यदि पार्टी को सौ सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिले तो उसे मान्यता भी मिल सकती है।
मांझी ने यह भी कहा कि पार्टी के पास बिहार के कई इलाकों—पूर्णिया, मुंगेर, भागलपुर से लेकर बेतिया तक—समर्थन है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो पार्टी अलग रास्ता अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
जीतन राम मांझी के इस बयान के बाद बिहार की सियासत गरमा गई है और एनडीए के भीतर संभावित खींचतान को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।